कामत की वजह से चंदा ने शिखा को पीछे छोड़ा, आईसीआईसीईआई बैंक की डुबोई नैया
मुंबई। देश के शीर्ष बैंक के शीर्ष पद पद पर पहुंचने वाली चंदा कोचर आईसीआईसीआई बैंक में 2009 से 2018 तक एमडी एवं सीईओ रहीं। वे उस समय सबसे मजबूत महिला पेशेवरों में थीं। दावोस से लेकर वैश्विक स्तर के सम्मेलनों मे उनकी धमक दिखती थी। बैंक के बांद्रा कुर्ला कांप्लेक्स वाले मुख्यालय में उनके लिए अलग से लिफ्ट होती थी। एक ऐसी शानो शौकत जो दूसरे कॉरपोरेट समूहों में नहीं था। केवी कामत के चलते चंदा कोचर एमडी सीईओ तो बनीं, लेकिन दौड़ में आगे रहीं शिखा शर्मा उनसे पीछे हो गईं। बाद में वे एक्सिस बैंक की एमडी बनीं।
इसमें कोई दो राय नहीं है कि चंदा कोचर ने बैंक को एक ऐसी ऊंचाई पर पहुंचाया, जहां बैंक को उम्मीद से ज्यादा मिला। देश-विदेश में आईसीआईसीआई बैंक एक ब्रांड के रूप में मजबूत हुआ। लेकिन इसी चंदा कोचर के चलते बैंक देश में सबसे बड़े फ्रॉड का अड्डा बना और आज तक इस बदनामी से बैंक उबर नहीं पाया। उस समय 47 वर्षीय कोचर, जो 19 वर्षीय बेटी और 12 वर्षीय बेटे की मां थीं। 1 मई, 2009 को CEO बनीं। उनका कार्यकाल पांच साल का था, जो 2014 तक था। लेकिन बाद में उनको एक्सटेंशन मिला। कोचर और शर्मा के अलावा, ICICI कंपनी का नेतृत्व करने वाली दूसरी महिला ICICI वेंचर की रेणुका रामनाथ थीं। कोचर से पहले, ICICI में शीर्ष पदों के करीब दो अन्य महिलाएं थीं। पूर्व संयुक्त प्रबंध निदेशक ललिता गुप्ते और उपाध्यक्ष कल्पना मोरपारिया।
और बात यहीं खत्म नहीं होती। दो और महिलाएं भी इस पद के लिए तैयार थीं। माधबी पुरी बुच बैंक की तीन कार्यकारी निदेशकों में से एक थीं, जबकि विशाखा मुल्ये आईसीआईसीआई लोम्बार्ड में कार्यकारी निदेशक थीं। एचएसबीसी इंडिया की नैना लाल किदवई, एबीएन अमरो की मीरा सान्याल और सार्वजनिक क्षेत्र के सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया की एच.ए. दारूवाला भारत में बैंकों का नेतृत्व करने वाली अन्य तीन महिलाएं उस समय थीं। आईसीआईसीआई बैंक में 33 वर्षों का अनुभव रखने वाली और जेपी मॉर्गन की भारत की सीईओ मोरपारिया का कहती थीं कि आईसीआईसीआई का “लिंग-भेदभाव रहित” माहौल ही महिलाओं को आगे बढ़ने में मदद करता है।
आईसीआईसीआई बैंक के सीईओ कामथ ने कई साक्षात्कारों में शीर्ष पदों पर महिलाओं की संख्या के मुद्दे को कम महत्व देते हुए इसे योग्यता का परिणाम बताया है, न कि लिंग का। पर इन सभी का महिलाओं को लेकर दिया गया इतना लंबा लंबा बयान कुछ सालों में ही पूरा बेड़ा गर्क कर दिया। हितों के टकराव के एक मामले के कारण कोचर ने 2018 में अपने पद से इस्तीफा दे दिया। इसके बाद, आईसीआईसीआई बैंक ने उन्हें बर्खास्त कर दिया, जिसे बाद में भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने भी बरकरार रखा।

