फ्लाइट कैंसिलेशन और श्रम कानूनों का झटका: इंडिगो का मुनाफा 78% घटकर ₹550 करोड़
मुंबई- उड़ानों में व्यवधान और नए श्रम संहिता के लागू होने से इंडिगो की पैरेंट कंपनी इंटरग्लोब एविएशन दिसंबर तिमाही में 549 करोड़ का शुद्ध लाभ हुआ है। यह एक साल पहले की समान अवधि के 2,449 करोड़ की तुलना में 78 फीसदी कम है। तीसरी तिमाही में कंपनी को 1,546.5 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ। इसमें उड़ान व्यवधानों से 577 करोड़ व नए श्रम कानूनों के लागू होने के कारण 969 करोड़ का नुकसान शामिल है। आय 24,540 करोड़ रुपये रही।
अक्टूबर-दिसंबर तिमाही में इंडिगो का ऑपरेशन से रेवेन्यू सालाना आधार पर 6.2% बढ़कर 23,471 करोड़ रुपए रहा। एक साल पहले की समान तिमाही में कंपनी का रेवेन्यू 22,110 करोड़ रुपए रहा था। अगर उड़ानों की रद्दीकरण के घाटे को अलग कर दिया जाए तो कंपनी का मुनाफा करीब ₹2,096.3 करोड़ रहता। हालांकि, यह तब भी पिछले साल के मुकाबले 14% कम होता।
दिसंबर के क्राइसिस से हुआ ₹577 करोड़ का नुकसान : दिसंबर 2025 की शुरुआत में इंडिगो को बड़े पैमाने पर फ्लाइट्स कैंसिल करनी पड़ी थीं। इसकी मुख्य वजह ‘फ्लाइट ड्यूटी टाइम लिमिटेशन’ (FDTL) के नए नियम थे, जो 1 नवंबर से लागू हुए थे। इन नियमों के तहत पायलटों को ज्यादा आराम देना अनिवार्य था, लेकिन इंडिगो के पास उस हिसाब से पर्याप्त पायलट नहीं थे। 3 से 5 दिसंबर के बीच कंपनी ने 2,507 फ्लाइट्स कैंसिल कीं और 1,852 फ्लाइट्स लेट हुईं। इस संकट से करीब 3 लाख यात्री प्रभावित हुए थे। DGCA ने इस मामले में कंपनी पर ₹22 करोड़ का जुर्माना भी लगाया था।

