जानिए कैसे आईसीआईसीआई बैंक में टॉप पर थीं महिलाएं, लेकिन चंदा सबसे आगे निकलीं

मुंबई- आईसीआईसीआई बैंक कभी महिलाओं के टॉप पोस्ट की वजह से जाना जाता था। एक समय ऐसा था जब केवी कामत के साथ यहां पर शीर्ष पदों पर ५-६ महिलाएं विराजमान थीं। इनमें प्रमुख रूप से चंदा कोचर, शिखा शर्मा, रेणुका रामनाथ, कल्पना मोरपारिया, विशाखा मुले और बाद में सेबी की प्रमुख बनीं माधबी पुरी बुच।

यह महिलाएं आईसीआईसीआई बैंक से निकलकर अपने अपने संस्थानों के टॉप पोस्ट पर पहुंचीं। लेकिन क्या कारण था कि इन सबसे बीच में चंदा कोचर केवी कामत के बाद आईसीआईसीआई बैंक में एमडी बन गईं। इसी के बाद बाकी महिला अधिकारियों ने धीरे धीरे बैंक को अलविदा कह दिया। कहा तो जाता है कि केवी कामत जूनियर होने के बावजूद चंदा कोचर को पसंद करते थे। यही कारण है कि चंदा ने सभी को पीछे छोड़कर टॉप पद हासिल कर लिया।

उसके बाद कल्पना मोरपारिया जेपी मॉर्गन में चलीं गईं। माधबी पुरी बुच अमेरिका चलीं गईं। शिखा शर्मा एक्सिस बैंक की एमडी बनीं। हालांकि, बाद में वही माधबी बुच सेबी की प्रमुख बन गईं और वे तब भी आईसीआईसीआई बैंक में अपने साथ किए गए व्यवहार के कारण रेगुलेटर के हिसाब से चल रहीं थीं। केवी कामत के जाने के बाद चंदा कोचर ने  2009 में मुख्य कार्यकारी अधिकारी के रूप में पदभार संभाला। इस समय आईसीआईसीआई बैंक अपने सबसे बुरे संकट का सामना कर रहा था। एक दशक से भी कम समय में, ऐसा लगता है कि उन्होंने बैंक को हिलाकर रख दिया और उस बैंक से अचानक विदा ले ली, जिसे उन्होंने विस्तार देने में मदद की थी।

आईसीआईसीआई बैंक लिमिटेड की मुख्य कार्यकारी अधिकारी चंदा कोचर कहती हैं कि ऐसा लगता है कि कुछ ही समय पहले की बात है जब वह इस बात को लेकर चिंतित थीं कि क्या वह भारत के सबसे बड़े गैर-सरकारी ऋणदाता बैंक में अपने पद के साथ-साथ घर-परिवार और अपने नवजात बेटे की देखभाल को संभाल पाएंगी। बैंक के 11 मंजिला मुंबई मुख्यालय की शीर्ष मंजिल पर स्थित कार्यकारी भोजन कक्ष में सलाद खाते हुए 49 वर्षीय कोचर कहती थीं, “मैंने मातृत्व अवकाश लिया था और वापस आ गई थी।” मुझे यह थोड़ा मुश्किल लगा। बैंक के प्रति उनके इस लगाव को फाइनेंशियल दुनिया में काफी सराहा गया।

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