थोक महंगाई आठ महीने के उच्च स्तर पर, खाद्य वस्तुओं और मैन्युफैक्चरिंग कीमतों ने बढ़ाया दबाव
मुंबई- सब्जी, दाल एवं फल समेत अन्य खाद्य वस्तुओं और विनिर्मित उत्पादों की कीमतों में उछाल से थोक महंगाई दिसंबर, 2025 में मासिक आधार पर बढ़कर आठ महीने के उच्च स्तर 0.83 फीसदी पर पहुंच गई। थोक मुद्रास्फीति इससे पहले अप्रैल, 2025 में सर्वाधिक 0.85 फीसदी रही थी। दिसंबर, 2024 में यह 2.57 फीसदी रही थी। उद्योग मंत्रालय की ओर से बुधवार को जारी आंकड़ों के मुताबिक, दिसंबर लगातार दूसरा महीना रहा, जब थोक मूल्य सूचकांक (डब्ल्यूपीआई) आधारित महंगाई बढ़ी है।
डब्ल्यूपीआई मुद्रास्फीति सितंबर, 2025 के बाद पहली बार सकारात्मक दायरे में आई है। अक्तूबर में यह शून्य से नीचे 1.21 फीसदी और नवंबर में (-)0.32 फीसदी रही थी। मंत्रालय ने कहा, खाने-पीने की वस्तुओं, गैर-खाद्य उत्पाद और विनिर्मित वस्तुओं की कीमतों में मासिक आधार पर बढ़ोतरी से थोक महंगाई में वृद्धि दर्ज की गई।
आंकड़ों के मुताबिक, बीते महीने खाने-पीने की वस्तुओं की महंगाई दर मासिक आधार पर बढ़कर (-)0.43 फीसदी पहुंच गई। नवंबर में यह शून्य से नीचे 4.16 फीसदी रही थी। सब्जियों की महंगाई दर में तेज वृद्धि देखने को मिली और यह दिसंबर में बढ़कर (-)3.50 फीसदी के स्तर पर पहुंच गई। नवंबर में यह शून्य से नीचे 20.23 फीसदी रही थी। विनिर्मित उत्पादों के मामले में मुद्रास्फीति नवंबर 2025 के 1.33 फीसदी के मुकाबले बढ़कर दिसंबर में 1.82 फीसदी के स्तर पर पहुंच गई।
कैलेंडर वर्ष 2024 के मुकाबले 2025 में औसत थोक महंगाई दर में बड़ी गिरावट आई है। 2025 में पूरे वर्ष के दौरान थोक मुद्रास्फीति की दर औसतन महज 0.6 फीसदी रही है, जबकि 2024 में यह पूरे साल के दौरान करीब 1.74 फीसदी के स्तर पर रही थी। आरबीआई ने बीते महीने चालू वित्त वर्ष 2025-26 के लिए महंगाई के अनुमान को घटाकर दो फीसदी कर दिया है। इससे पहले 2.6 फीसदी का अनुमान जताया था। केंद्रीय बैंक रेपो दर के मोर्चे पर फैसले लेने के लिए वृद्धि दर के साथ खुदरा महंगाई पर भी नजर रखता है। खुदरा महंगाई दिसंबर, 2025 में बढ़कर तीन महीने के उच्च स्तर 1.33 फीसदी पर पहुंच गई थी।

