अमीर-गरीब की खाई युवाओं की सबसे बड़ी आर्थिक चिंता, सत्ता संभालने को भी तैयार नई पीढ़ी
मुंबई- अमीर और गरीब के बीच बढ़ती असमानता दुनियाभर के युवाओं के लिए सबसे बड़ी आर्थिक चिंता है। इनमें से बड़ी संख्या में युवा केवल आलोचना करने के बजाय राजनीतिक पद के लिए चुनाव लड़ना चाहते हैं। विश्व आर्थिक मंच की यूथ पल्स-2026 रिपोर्ट में 144 देशों और क्षेत्रों के 18-30 आयु वर्ग के लगभग 4,600 युवाओं के साथ किए गए सर्वे में यह जानकारी दी गई है।
रिपोर्ट के अनुसार, 48.2 फीसदी युवा अमीर और गरीब के बीच बढ़ती असमानता को भविष्य को आकार देने वाले प्रमुख आर्थिक रुझान के रूप में पहचानते हैं। उप-सहारा अफ्रीका और दक्षिण एशिया जैसे क्षेत्रों में उद्यमिता सबसे शक्तिशाली आर्थिक शक्ति के रूप में उभरी है। यह नवाचार और आत्मनिर्भरता में बढ़ते विश्वास को दर्शाती है, जो अवसरों के प्रमुख चालक हैं। 57 फीसदी से अधिक लोगों ने वित्तीय चिंताओं को अपने तनाव या चिंता के सबसे बड़े स्रोतों में से एक बताया।
युवाओं की प्राथमिकताएं व्यावहारिक और नीति निर्माण के लिए तैयार हैं। सशक्तिकरण के लिए सबसे अधिक बताए गए उपायों में युवाओं के लिए रोजगार के अवसर सृजित करना (57.2 फीसदी), सस्ती और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा तक समान पहुंच (46.1 फीसदी), और सस्ते आवास और वित्तीय स्वतंत्रता (32.2 फीसदी) शामिल हैं। यह दर्शाता है कि विश्वास घर के करीब रहकर ही अर्जित किया जाता है। 60 फीसदी युवाओं ने सकारात्मक बदलाव लाने में सामुदायिक नेताओं को सबसे प्रभावी माना। इससे निकटवर्ती, जवाबदेह और ठोस परिणाम देने वाले नेतृत्व की मांग को बल मिला।
देशों के बीच तनाव और लोकतांत्रिक क्षरण पर चिंता के बावजूद लगभग आधे उत्तरदाताओं ने सकारात्मक राजनीतिक बदलावों को उजागर किया । यह पीढ़ी केवल आलोचना करने के लिए नहीं, बल्कि शासन करने के लिए भी तैयार है, क्योंकि 36 फीसदी ने कहा, वे राजनीतिक पद के लिए चुनाव लड़ने की संभावना रखते हैं, जो राजनीतिक उदासीनता की धारणाओं को चुनौती देता है।
जलवायु परिवर्तन सबसे बड़ा खतरा
56 फीसदी से अधिक ने जलवायु परिवर्तन और पर्यावरण क्षरण को सबसे बड़ा खतरा बताया। व्यक्तिगत रूप से 51 फीसदी ने महंगाई व अस्थिरता को सबसे बड़ी चिंता बताया। 41 फीसदी ने जलवायु परिवर्तन को अपने जीवन के लिए दूसरा सबसे बड़ा खतरा बताया।
एआई से नौकरियों पर होगा असर
दो-तिहाई उत्तरदाताओं का मानना था कि एआई से प्रवेश स्तर की नौकरियों के अवसर कम हो जाएंगे। 60 फीसदी युवाओं ने अपने कौशल को बढ़ाने के लिए नियमित रूप से एआई का उपयोग करने की बात कही। एक तिहाई ने कभी-कभार इसका प्रयोग किया। केवल एक छोटा हिस्सा ही अब तक एआई उपकरणों से जुड़ा नहीं था। युवाओं के बीच एआई का नियमित उपयोग सभी क्षेत्रों में उच्च पाया गया। यह इस धारणा को चुनौती देता है कि डिजिटल नवाचार कुछ ही बाजारों में केंद्रित है। सर्वेक्षण के परिणामों प 19-23 जनवरी को स्विट्जरलैंड के दावोस में होने वाली विश्व स्वास्थ्य संगठन की वार्षिक बैठक के दौरान चर्चा होने की संभावना है।
साइबर धोखाधड़ी सीईओ के लिए बड़ी चिंता
अध्ययन के अनुसार, साइबर आधारित धोखाधड़ी वैश्विक स्तर पर सीईओ के लिए सबसे बड़ी चिंता का विषय बन गई है। इसने रैंसमवेयर को पीछे छोड़ दिया है। अधिकांश का मानना है कि इस वर्ष साइबर सुरक्षा को आकार देने वाली सबसे बड़ी शक्ति कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) होगी। देशों के बीच राजनीतिक अस्थिरता राष्ट्रीय साइबर तैयारियों में विश्वास को कमजोर कर रही है। इसमें 31 फीसदी ने महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे पर हमलों का जवाब देने की अपने देशों की क्षमता में कम विश्वास व्यक्त किया है। सर्वेक्षण में शामिल उत्तरदाताओं में 105 सीईओ और 316 मुख्य सूचना सुरक्षा अधिकारी शामिल थे।

