जोहो के फाउंडर श्रीधर वेम्बू को तलाक के लिए देना पड़ सकता है 15 हजार करोड़ रुपए हर्जाना
जोहो कंपनी के फाउंडर और सीईओ श्रीधर वेम्बू को कैलिफोर्निया की एक अदालत ने तलाक के मामले में 15 हजार करोड़ रुपए का बॉन्ड जमा करने का आदेश दिया है। खास बात है कि इसे भारत का सबसे महंगा तलाक बताया जा रहा है। वेम्बू की पत्नी प्रमिला श्रीनिवासन अमेरिका में शिक्षाविद व बिजनेस पर्सन हैं। दोनों का एक बेटा भी है।
श्रीधर वेम्बु ने आईआईटी-मद्रास से पढ़ाई के बाद 1989 में अमेरिका जाकर प्रिंसटन से पीएचडी की। 1993 में उन्होंने प्रमिला श्रीनिवासन से शादी की। 1996 में एडवेंटनेट (बाद में 2009 में जोहो) शुरू की। दोनों करीब 30 साल कैलिफोर्निया में रहे। उनका 26 साल का एक बेटा है। 2019 में वेम्बु भारत लौट आए और तमिलनाडु के अपने पैतृक गांव मथलमपराई से कंपनी चला रहे हैं। 2021 में उन्होंने तलाक की याचिका दाखिल की।
प्रमिला ने कोर्ट में दावा किया कि वेम्बु ने उन्हें और बेटे को छोड़ दिया है। उन्होंने आरोप लगाया कि वेम्बु ने जोहो के शेयर और प्रॉपर्टी को कॉम्प्लेक्स ट्रांजेक्शन से भारत ट्रांसफर कर दिया, बिना उनकी जानकारी या सहमति के। उन्होंने यह भी कहा कि कंपनी के ज्यादातर शेयर बहन राधा वेम्बु (47.8%) और भाई सेकर (35.2%) के पास हैं, जबकि वेम्बु के पास सिर्फ 5% (225 मिलियन डॉलर) बचा है।
वेम्बु के वकील बोले- हम अपील करेंगे इस मामले में विवाद बढ़ने पर श्रीधर वेम्बु के वकील क्रिस्टोफर सी. मेल्चर ने सफाई दी है। उन्होंने सोशल मीडिया (X) पर लिखा कि प्रमिला के वकील ने जज को पूरी तरह गुमराह किया है। मेल्चर के मुताबिक, श्रीधर ने अपनी पत्नी को कंपनी के 50% शेयर ऑफर किए थे, लेकिन उन्होंने इसे स्वीकार करने से मना कर दिया। वकील ने 1.7 बिलियन डॉलर के बॉन्ड ऑर्डर को ‘अमान्य’ बताया और कहा कि इसके खिलाफ अपील की गई है।
1996 में ZOHO कॉर्पोरेशन की शुरुआत साल 1996 में वेम्बू ने अपने दो भाइयों और मित्र टोनी थॉमस के साथ मिलकर ‘एडवेंटनेट (AdventNet)’ नाम की एक सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट कंपनी की शुरुआत की। ये कंपनी नेटवर्क सॉल्यूशन प्रोवाइड करती थी। साल 2009 में इसी कंपनी का नाम बदलकर ‘ZOHO कॉर्पोरेशन’ रखा गया। फोर्ब्स के अनुसार, श्रीधर वेम्बू भारत के 47वें सबसे अमीर व्यक्ति हैं, जिनकी संपत्ति लगभग 6 बिलियन डॉलर यानी 54 हजार करोड़ रुपए आंकी गई है।

