भारत में रिकॉर्ड धान उत्पादन से वैश्विक बाजार में दबाव, चावल की कीमतों में और गिरावट के आसार
नई दिल्ली/मुंबई: भारत में इस सीजन की धान की रिकॉर्ड फसल से वैश्विक चावल बाजार में दबाव बढ़ गया है। किसान इस बंपर उत्पादन की कटाई पूरी करने की ओर हैं, जिससे घरेलू अधिशेष बढ़ रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहले से पर्याप्त स्टॉक मौजूद होने और कमजोर मांग के चलते भारत के चावल निर्यातकों को कीमतें घटाने पर मजबूर होना पड़ सकता है।
वैश्विक दबाव और भारत की चुनौती
विशेषज्ञों के अनुसार, थाईलैंड और वियतनाम जैसे प्रमुख निर्यातकों के मुकाबले टिके रहने के लिए भारतीय किसानों को कीमतों में कमी करनी पड़ सकती है। ओलम इंडिया के डिप्टी मैनेजिंग डायरेक्टर नितिन गुप्ता ने रायपुर में आयोजित इंडिया इंटरनेशनल राइस समिट में कहा कि खरीदार फिलहाल इंतजार की रणनीति अपना रहे हैं और देख रहे हैं कि भारत में बड़े घरेलू अधिशेष के चलते कीमतें कितनी नीचे तक जा सकती हैं।
भारत में रिकॉर्ड उत्पादन
कृषि मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, 2025-26 सीजन में भारत का मानसून-आधारित धान उत्पादन 12.45 करोड़ टन (124.5 मिलियन टन) तक पहुंच गया है। यह फसल आमतौर पर जून-जुलाई में बोई जाती है और इसकी कटाई अब अंतिम चरण में है। इस रिकॉर्ड उत्पादन ने घरेलू बाजार में अधिशेष को और बढ़ा दिया है।
कीमतों में संभावित गिरावट
नितिन गुप्ता का अनुमान है कि अफ्रीका और पश्चिम एशिया से निकट भविष्य में मांग कमजोर रहने के कारण मार्च-अप्रैल तक भारतीय चावल की कीमतें मौजूदा करीब 350 डॉलर प्रति टन से 15 से 25 डॉलर प्रति टन तक और गिर सकती हैं।
एशिया का बेंचमार्क चावल मूल्य दिसंबर 2024 के बाद एक ही हफ्ते में 4 प्रतिशत से अधिक गिर गया है। हालांकि, अक्टूबर के अंत में कीमतें 10 साल के निचले स्तर पर थीं और तब से 20 प्रतिशत से अधिक उछाल आई थी। थाईलैंड से निर्यात घटने के अनुमान के बावजूद, फिलीपींस और इंडोनेशिया जैसे बड़े आयातकों द्वारा लगाए गए प्रतिबंध पूरे एशिया में किसानों को प्रभावित कर रहे हैं।
वैश्विक उत्पादन और भंडार
संयुक्त राष्ट्र के खाद्य और कृषि संगठन (FAO) के अनुसार, 2025-26 में वैश्विक चावल उत्पादन 55.88 करोड़ टन (558.8 मिलियन टन) के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच सकता है। भारत में मजबूत बुवाई का इसमें बड़ा योगदान है। FAO का कहना है कि इस उत्पादन वृद्धि से वैश्विक चावल भंडार भी नए उच्च स्तर पर पहुंच सकता है, जिससे कीमतों पर और दबाव बढ़ेगा।
किसानों और बाजार के लिए संकेत
विशेषज्ञ मानते हैं कि यह रिकॉर्ड उत्पादन वैश्विक खाद्य सुरक्षा के लिहाज से सकारात्मक है, लेकिन किसानों के लिए चुनौतीपूर्ण स्थिति पैदा कर सकता है। यदि मांग में सुधार नहीं हुआ, तो आने वाले महीनों में चावल बाजार में कीमतों की नरमी जारी रह सकती है।

