अर्थव्यवस्था की रफ्तार पर सवाल, पूर्व सीईए अरविंद सुब्रमण्यन ने मोदी सरकार को घेरा

मुंबई-पूर्व मुख्य आर्थिक सलाहकार अरविंद सुब्रमण्यन ने भारत की ग्रोथ को लेकर चिंता जाहिर की है। उन्होंने कहा कि देश की अर्थव्यवस्था शायद ठीक होने की राह पर नहीं है। बाहरी और अंदरूनी दबावों के कारण विकास धीमा हो सकता है। ब्लूमबर्ग टेलीविजन को दिए एक इंटरव्यू में उन्होंने अमेरिका की तरफ से संभावित टैरिफ, चीन के बढ़ते निर्यात और सरकारी खजाने पर दबाव जैसी चिंताओं का जिक्र किया।

इस साल मार्च में खत्म हुए वित्तीय वर्ष में भारत की अर्थव्यवस्था 7.4% बढ़ी है।  सुब्रमण्यन ने इस आंकड़े को सावधानी से देखने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि यह अनुमान पुरानी समस्या यानी मापने की सटीकता से प्रभावित हो सकता है। उन्होंने जीडीपी की गणना में इस्तेमाल होने वाले डिफ्लेटर (मुद्रास्फीति को हटाने वाला आंकड़ा) के असामान्य रूप से कम होने का भी जिक्र किया।

सुब्रमण्यन ने कहा कि यह साफ नहीं है कि अर्थव्यवस्था सुधर रही है। जो आंकड़े हमें अर्थव्यवस्था की मौजूदा स्थिति बताते हैं, वे धीमे हो रहे हैं। साथ ही, नाममात्र की वृद्धि दर (बिना मुद्रास्फीति के) भी कम हो रही है। इससे अर्थव्यवस्था की रफ्तार और दिशा दोनों पर सवाल उठता है। उन्होंने कहा, ‘मैं विकास दर का कोई सटीक आंकड़ा नहीं बता सकता, लेकिन अगर अगले साल विकास दर इस साल जैसी ही रहती है, तो भारत को खुद को भाग्यशाली मानना चाहिए और इसे एक बड़ी उपलब्धि समझना चाहिए, खासकर इस अनिश्चितता के माहौल में।’

सुब्रमण्यन ने अमेरिका की व्यापार नीति से जुड़े जोखिमों पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा भारतीय सामानों पर लगाए गए 50% टैरिफ अभी भी चिंता का विषय हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि अब ऐसा कम ही लग रहा है कि कोई व्यापार समझौता होगा। उन्होंने यह भी कहा कि टैरिफ की दरें और बढ़ सकती हैं।

सुब्रमण्यन ने यह भी बताया कि भारत कैसे गति पकड़ सकता है। उन्होंने निर्यातकों को बाहरी झटकों से बचाने के लिए भारत की मुद्रा नीति में अधिक लचीलेपन की मांग की। उन्होंने कहा कि जब सरकारी खजाने में ज्यादा पैसा न हो, तो मुद्रा का अवमूल्यन (रुपये का गिरना) सबसे प्रभावी तरीका हो सकता है। उन्होंने कहा कि भारतीय रिजर्व बैंक रुपये को पूरी तरह से लचीला बनाने में हिचकिचाता हुआ दिख रहा है। इस नीति पर और गहराई से विचार करने की जरूरत है।

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