अमेरिकी टैरिफ की मार झेल रहे निर्यातकों को नए तरीके से राहत दे सकता है आरबीआई
मुंबई। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) अमेरिकी टैरिफ से प्रभावित निर्यातकों को समर्थन देने के नए तरीकों पर विचार कर रहा है। ऐसा इसलिए क्योंकि पिछले साल उसके प्रस्तावित ऋण भुगतान स्थगन को कम लोगों ने स्वीकार किया था। कपड़ा निर्माण और आभूषण से लेकर चमड़े के सामान और रसायन कंपनियों तक के क्षेत्र अमेरिका के 50 फीसदी टैरिफ से प्रभावित हुए हैं।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इसी हफ्ते चेतावनी दी कि यदि भारत अपने रूसी तेल आयात पर अंकुश नहीं लगाता है तो टैरिफ और बढ़ सकते हैं। पिछले साल अमेरिका द्वारा टैरिफ लगाए जाने के बाद, भारतीय रिजर्व बैंक और सरकार ने राहत उपाय शुरू किए थे। आरबीआई ने नवंबर में अमेरिका में कारोबार करने वाले निर्यातकों को 1 सितंबर से 31 दिसंबर के बीच देय सावधि ऋणों के पुनर्भुगतान को स्थगित करने का अधिकार दिया था। लेकिन पात्र निर्यातकों में से बहुत कम ने आवेदन किया। इस वजह से केंद्रीय बैंक निर्यातकों की मदद के लिए अन्य तरीकों पर विचार कर रहा है। इसमें ऋण स्थगन के लिए पात्रता मानदंडों में ढील दी जा सकती है या रियायती ब्याज दरों पर नए ऋण जारी करने की अनुमति दी जा सकती है।
एक सरकारी बैंक के अधिकारी के मुताबिक, बैंकों को राजस्व हानि का प्रमाण देना आवश्यक था, जो कई कंपनियां दिसंबर तक नहीं दे पाईं। बहुत कम निर्यातकों ने भुगतान स्थगन के लिए आवेदन किया था। सरकार से हुई बातचीत में बैंकरों ने कहा है कि ऋण राहत की तुलना में नकद सब्सिडी अधिक मददगार साबित हो सकती है, जो व्यावसायिक नुकसान या निर्यात मार्जिन में आई गिरावट के प्रभाव को कम करने में सहायक हो सकती है। केंद्रीय बैंक और बैंकर नए राहत उपायों को अंतिम रूप देने से पहले नए साल में ऑर्डर के प्रवाह का आकलन करने के लिए निर्यात एजेंसियों के साथ बातचीत कर रहे हैं। नवंबर तक अमेरिका को भारत का निर्यात स्थिर बना रहा क्योंकि कई निर्यातकों ने टैरिफ लागू होने से पहले ही ऑर्डर पक्के कर लिए थे, जबकि अन्य ने पूरी आय का नुकसान होने से बचने के लिए कम मार्जिन पर माल भेजने की पेशकश की।

