कम फीस मिलने के कारण SBI फंड्स के IPO से हट गए जेपी मॉर्गन और सिटी ग्रुप

मुंबई-वॉल स्ट्रीट के कुछ सबसे बड़े बैंक एसबीआई फंड्स मैनेजमेंट लि. के करीब 13,000 करोड़ के प्रस्तावित प्रारंभिक सार्वजनिक निर्गम (आईपीओ) के प्रबंधन से हाथ खींच लिया है। ऐसा इसलिए, क्योंकि एसबीआई ने उनके हिसाब से फीस देने से मना कर दिया है। इन बैंकों में प्रमुख रूप से सिटी ग्रुप, जेपी मॉर्गन और अन्य शामिल हैं। ये सभी शुरुआत में सलाहकारों की सूची में थे।

सूत्रों ने बताया कि एसबीआई फंड्स जो फीस देने को राजी था, वह उद्योग की तुलना में बहुत कम था। इसका कारण यह है कि एसबीआई अपने ब्रांड के नाम के हिसाब से कम फीस दे रहा था। उसे विश्वास है कि उसका इश्यू उसके नाम से चल जाएगा। अब सिटी ग्रुप की जगह एसबीआई फंड्स ने जेफरीज फाइनेंशियल को नियुक्त किया है। एक सूत्र ने बताया, जेपी मॉर्गन चेस एंड कंपनी ने भी प्रस्ताव पेश करने के बाद इसी तरह के कारणों से इस सौदे को आगे न बढ़ाने का फैसला किया।

इस आईपीओ में अपने शेयर बेचने वाले शेयरधारकों में सरकारी भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) और फ्रांस की अमुंडी एसए हैं। इन दोनों ने इश्यू साइज का लगभग 0.01 फीसदी फीस देने की पेशकश की। इसे बैंकरों ने बेहद कम बताया। सूत्रों के अनुसार, कुछ घरेलू सलाहकारों ने इस काम के लिए नाममात्र का शुल्क मांगा था। तुलनात्मक रूप से कंपनियों ने पिछले साल इश्यू साइज का औसतन 1.86 फीसदी शुल्क दिया था, जो 2024 में दिए गए 1.67 फीसदी से अधिक था।

प्रबंधन के लिए चुने गए थे ये बैंकर

एसबीआई फंड्स के आईपीओ के लिए कोटक महिंद्रा कैपिटल, एक्सिस बैंक, एसबीआई कैपिटल मार्केट्स, मोतीलाल ओसवाल इन्वेस्टमेंट एडवाइजर्स, आईसीआईसीआई सिक्योरिटीज और जेएम फाइनेंशियल के साथ सिटीग्रुप, एचएसबीसी होल्डिंग्स पीएलसी और बैंक ऑफ अमेरिका कॉर्प की स्थानीय इकाइयों को काम करने के लिए चुना गया था।

एक रुपये में किया था काम

जब स्टेट बैंक ने जुलाई में शेयर बिक्री के जरिये 250 अरब रुपये जुटाए, तो उसने छह बैंकरों को केवल एक-एक रुपया दिया। ऐसे सौदों में बैंक अक्सर नाममात्र शुल्क लेते हैं क्योंकि वे प्रतिष्ठा, वित्तीय स्तर पर बेहतर साख और लंबे समय में संबंध बनाने की होड़ में रहते हैं। एसबीआई फंड्स स्टेट बैंक और अमुंडी के संयुक्त स्वामित्व में है। आईपीओ के जरिये 10 फीसदी हिस्सा बेचने की योजना है।

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