रिलायंस का शेयर 5 फीसदी टूटा, एक लाख करोड़ घटी पूंजी, एचडीएफसी बैंक 4.5 फीसदी टूटा

मुंबई- रिलायंस इंडस्ट्रीज लि. (आरआईएल) के शेयर मंगलवार को बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज पर 4.42 फीसदी तक गिर गए। इससे कंपनी की पूंजी में करीब एक लाख करोड़ रुपये घटकर 20.40 लाख करोड़ रुपये रह गई। 4 जून, 2024 के बाद शेयरों में यह सबसे बड़ी एक दिनी गिरावट है। दिन में शेयर 5 फीसदी से ज्यादा टूटकर 1,497 रुपये तक आ गए थे। यह गिरावट रूसी कच्चे तेल से भरे तीन जहाज के जामनगर रिफाइनरी की ओर जाने की खबरों के बीच दर्ज की गई।

इसकी गिरावट की वजह एक न्यूज रिपोर्ट को माना जा रहा है, जिसमें यह दावा किया गया था कि तीन रूसी कच्चे तेल से लदे टैंकर भारत के पश्चिमी तट पर स्थित रिलायंस की जामनगर रिफायनरी के लिए जा रहे हैं। हालांकि, रिलायंस की ओर से इन रिपोर्ट्स को खारिज कर दिया गया है।

रिलायंस इंडस्ट्रीज के स्टॉक में यह गिरावट ऐसे समय पर आई है, जब इसने सोमवार को ही नया ऑल-टाइम हाई लगाया था। इस वजह से जानकार इसे मुनाफावसूली मान रहे हैं। भारतीय शेयर बाजार के मुख्य सूचकांक भी कारोबारी सत्र में लाल निशान में बंद हुए। दिन के अंत में सेंसेक्स 376.28 अंक या 0.44 प्रतिशत की गिरावट के साथ 85,063.34 और निफ्टी 71.60 अंक या 0.27 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 26,178.70 पर था।

पिछले दो दिनों में HDFC बैंक के शेयर में तेज गिरावट देखने को मिली है, जिसका असर पूरे शेयर बाजार पर पड़ा है। मंगलवार को HDFC बैंक का शेयर 2.2 फीसदी टूट गया, जिससे दो दिन की कुल गिरावट 4.5 फीसदी हो गई। यह शेयर 23 अक्टूबर 2025 को ₹1,020 के अपने रिकॉर्ड हाई पर पहुंचा था, लेकिन वहां से अब तक करीब 6.3 फीसदी नीचे आ चुका है। इस दौरान बीएसई सेंसेक्स में सिर्फ 0.9 फीसदी की हल्की गिरावट दर्ज की गई है।

विश्लेषकों के अनुसार HDFC बैंक के शेयर में आई अचानक गिरावट के दो मुख्य कारण हैं। पहला, विदेशी निवेशकों द्वारा मुनाफावसूली और दूसरा, बैंक के तीसरी तिमाही (Q3FY26) के बिजनेस अपडेट के बाद घरेलू निवेशकों में घबराहट। वेल्थमिल्स सिक्योरिटीज के इक्विटी डायरेक्टर क्रांति बाथिनी का कहना है कि Q3 के आंकड़े किसी भी तरह से कमजोर नहीं हैं। बड़े बैंक के हिसाब से लोन और जमा में अच्छी बढ़त दर्ज हुई है, लेकिन विदेशी संस्थागत निवेशकों की भारी बिकवाली ने शेयर पर दबाव बना दिया।

अक्टूबर से दिसंबर तिमाही में HDFC बैंक की लोन बुक सालाना आधार पर 11.9 फीसदी बढ़कर ₹28.44 लाख करोड़ पहुंच गई। वहीं, बैंक का कुल डिपॉजिट 11.5 फीसदी की बढ़त के साथ ₹28.59 लाख करोड़ हो गया। इस दौरान बैंक का क्रेडिट-टू-डिपॉजिट रेशियो बढ़कर 98.5 फीसदी पर पहुंच गया, जो पिछली तिमाही में 98 फीसदी और Q1FY26 में 95 फीसदी था। आम तौर पर ज्यादा CDR होने से नए लोन देने की क्षमता पर असर पड़ता है, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि HDFC जैसे बड़े बैंक के लिए यह कोई बड़ी चिंता की बात नहीं है।

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