जून तक 50 डॉलर प्रति बैरल पहुंच सकती हैं कच्चे तेल का दाम, लेकिन आपको महंगा मिलेगा
मुंबई- कच्चे तेल की कीमतों में इस साल काफी नरमी आने की उम्मीद है। जून तक ये कीमतें 50 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच सकती हैं। एसबीआई रिसर्च की रिपोर्ट के मुताबिक, कीमतों में गिरावट और तेज होने की संभावना है। इससे 2026-27 के लिए खुदरा महंगाई दर 3.4 फीसदी से काफी नीचे आ सकती है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि ऊर्जा की कीमतों में नरमी से अर्थव्यवस्था के दृष्टिकोण पर सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा। इससे वार्षिक जीडीपी वृद्धि पर इसका असर लगभग 0.10 से 0.15 फीसदी तक रहने की उम्मीद है। 2022 से ब्रेंट और भारतीय बास्केट के मध्यम अवधि के रुझान कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट दर्शाते हैं। वेनेजुएला में हुई हालिया घटना का कीमतों पर कोई खास सकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ा है।
पिछले एक सप्ताह से ब्रेंट क्रूड की कीमत लगभग 60 डॉलर प्रति बैरल के आसपास बनी हुई है। इस विश्लेषण में कहा गया है कि चूंकि तेल की कीमतें आयात बास्केट का सबसे बड़ा हिस्सा हैं और अल्पावधि में घरेलू उत्पादन से इनकी भरपाई नहीं की जा सकती, इसलिए आयात की कीमतों में वृद्धि के कारण आयात बिल में कमी से रुपये पर असर पड़ेगा। यदि 90.28 रुपये प्रति रुपये की आधार कीमत मान लें, तो 14 फीसदी की अपेक्षित गिरावट के परिणामस्वरूप रुपये में 3 फीसदी की वृद्धि हो सकती है। यह लगभग 87.5 रुपये प्रति डॉलर है।

