शेयर बाजार में टाटा समूह का सबसे कमजोर साल, निवेशकों को 2025 में 3.70 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा का नुकसान

भारतीय शेयर बाजार में साल 2025 टाटा समूह के निवेशकों के लिए भारी निराशा लेकर आया। देश के सबसे प्रतिष्ठित और भरोसेमंद कारोबारी समूहों में शुमार टाटा ग्रुप इस वर्ष बाजार प्रदर्शन के मामले में सबसे कमजोर समूह बनकर उभरा। जहां रिलायंस, अदाणी और एचडीएफसी जैसे बड़े कारोबारी समूहों के बाजार पूंजीकरण में बढ़ोतरी देखने को मिली, वहीं टाटा समूह के निवेशकों को 3.70 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा की चपत लगी।

मार्केट कैप में भारी गिरावट
एक्सचेंज से मिले आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2024 के अंत तक सूचीबद्ध टाटा कंपनियों का संयुक्त बाजार पूंजीकरण करीब 30 लाख करोड़ रुपये था। लेकिन 2025 के अंत तक यह घटकर लगभग 26.3 लाख करोड़ रुपये रह गया। यानी एक साल में ही टाटा समूह के बाजार मूल्य में करीब 3.7 लाख करोड़ रुपये की गिरावट दर्ज की गई।

इसके उलट, इसी अवधि में

रिलायंस समूह का बाजार पूंजीकरण लगभग 4.7 लाख करोड़ रुपये बढ़ा,
अदाणी समूह में करीब 1.4 लाख करोड़ रुपये की बढ़ोतरी हुई,
जबकि एचडीएफसी समूह ने भी मिले-जुले प्रदर्शन के बावजूद कुल मिलाकर लाभ दर्ज किया।

क्यों पिछड़ा टाटा समूह
विशेषज्ञों के मुताबिक, टाटा समूह के कमजोर प्रदर्शन के पीछे कई कारक रहे। आईटी, ऑटोमोबाइल और ग्लोबल ऑपरेशंस से जुड़ी चुनौतियों ने समूह की प्रमुख कंपनियों पर दबाव बनाए रखा। इसके अलावा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मांग में सुस्ती, लागत बढ़ने और कुछ परिचालन बाधाओं ने निवेशकों की धारणा को प्रभावित किया।

टाटा मोटर्स पैसेंजर व्हीकल्स सबसे ज्यादा नुकसान में
1. टाटा समूह की कंपनियों में सबसे बड़ा झटका टाटा मोटर्स पैसेंजर व्हीकल्स को लगा।

2. कंपनी के शेयरों में साल 2025 के दौरान 22 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई।

3. इससे कंपनी का बाजार मूल्य करीब 38,000 करोड़ रुपये घट गया।

इस गिरावट की प्रमुख वजह जगुआर लैंड रोवर (JLR) में हुआ साइबर हमला रहा, जिसने कंपनी के वैश्विक परिचालन को प्रभावित किया और लागत व आपूर्ति शृंखला से जुड़ी चिंताओं को बढ़ा दिया।

टीसीएस के शेयरों पर भी दबाव

  1. आईटी सेक्टर की दिग्गज कंपनी टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) भी इस साल निवेशकों की उम्मीदों पर खरी नहीं उतर पाई।
  2. टीसीएस के शेयरों में करीब 19 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई।
  3. वैश्विक आईटी खर्च में कमी, क्लाइंट बजट में कटौती और अमेरिका-यूरोप में आर्थिक अनिश्चितता का सीधा असर कंपनी के प्रदर्शन पर पड़ा।

निवेशकों के लिए क्या संकेत
बाजार विश्लेषकों का मानना है कि टाटा समूह का यह कमजोर प्रदर्शन अस्थायी हो सकता है, लेकिन यह संकेत जरूर देता है कि निवेशकों को केवल ब्रांड वैल्यू के बजाय सेक्टर ट्रेंड, वैश्विक जोखिम और कंपनी-विशेष के कारकों पर भी ध्यान देना होगा। आने वाले समय में समूह का प्रदर्शन इस बात पर निर्भर करेगा कि ऑटो और आईटी कारोबार में रिकवरी कितनी तेज होती है।

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