BFSI सेक्टर पर विदेशी निवेशकों की बड़ी बाजी, 2025 में 1.35 लाख करोड़ रुपये की पूंजी भारत में आई

भारत का बैंकिंग, वित्तीय सेवा और बीमा (BFSI) क्षेत्र वर्ष 2025 में वैश्विक निवेशकों के लिए सबसे आकर्षक गंतव्यों में से एक बनकर उभरा है। घरेलू वित्तीय प्रणाली में मजबूती, नियामकीय स्थिरता और लंबी अवधि की विकास संभावनाओं के चलते इस साल BFSI सेक्टर में करीब 1.35 लाख करोड़ रुपये (15 अरब डॉलर) का निवेश दर्ज किया गया। इस निवेश में विदेशी बैंक, बीमा कंपनियां, प्राइवेट इक्विटी फंड और सरकारी निवेशक शामिल रहे, जिन्होंने हिस्सेदारी खरीद, नियंत्रण सौदों और पूंजी निवेश के जरिए भारतीय वित्तीय संस्थानों में भरोसा जताया।

वैश्विक निवेशकों का बदला नजरिया
2025 में बैंकों, गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (NBFCs) और बीमा कंपनियों में हुए बड़े सौदों ने यह साफ कर दिया कि वैश्विक निवेशक अब भारत की वित्तीय प्रणाली को संरचनात्मक रूप से मजबूत और दीर्घकालिक विकास योग्य मान रहे हैं। इस वर्ष को पिछले वर्षों से अलग बनाने वाला पहलू रहा—सीमा पार निवेश का आकार और रणनीतिक उद्देश्य। यह निवेश अवसरवादी या अल्पकालिक नहीं था, बल्कि भारतीय वित्तीय संस्थानों की बैलेंस शीट को लंबे समय तक मजबूत बनाने वाला पूंजी प्रवाह था।

श्रीराम फाइनेंस में मित्सुबिशी यूएफजे का बड़ा दांव
जापान के मित्सुबिशी यूएफजे फाइनेंशियल ग्रुप (MUFG) द्वारा श्रीराम फाइनेंस में 4.4 अरब डॉलर में 20 प्रतिशत हिस्सेदारी हासिल करने का सौदा इस निवेश लहर का प्रमुख उदाहरण रहा। यह सौदा भारत के खुदरा और लघु व्यवसाय ऋण मंचों में विदेशी निवेशकों के बढ़ते भरोसे को दर्शाता है, जहां स्थिर रिटर्न और बड़े पैमाने पर विस्तार की संभावना मौजूद है।

आरबीएल बैंक में एमिरेट्स एनबीडी की एंट्री
संयुक्त अरब अमीरात के एमिरेट्स एनबीडी द्वारा आरबीएल बैंक में 60 प्रतिशत हिस्सेदारी हासिल करना भी एक ऐतिहासिक कदम माना जा रहा है। यह उन दुर्लभ मामलों में से एक है, जब किसी विदेशी बैंक ने भारतीय निजी क्षेत्र के बैंक का परिचालन नियंत्रण अपने हाथ में लिया है। इस सौदे ने यह संकेत दिया कि भारत का नियामक ढांचा अब इतना परिपक्व हो चुका है कि वह अच्छी तरह पूंजीकृत वैश्विक बैंकों को नेतृत्वकारी भूमिका में स्वीकार कर सकता है।

यस बैंक में सुमितोमो मित्सुई का निवेश
जापान के सुमितोमो मित्सुई बैंकिंग कॉरपोरेशन (SMBC) का यस बैंक में निवेश इस बात का संकेत है कि विदेशी बैंक भारत को अब सहायक या सीमित बाजार नहीं, बल्कि मुख्य विकास केंद्र के रूप में देख रहे हैं। यह निवेश भारत में दीर्घकालिक रणनीतिक उपस्थिति बनाने की सोच को दर्शाता है।

जापान बना प्रमुख पूंजी स्रोत
इन बड़े सौदों के जरिए जापान एक बार फिर भारत के BFSI सेक्टर के लिए सबसे अहम विदेशी निवेश स्रोत के रूप में उभरा है। इससे यह धारणा मजबूत होती है कि जापानी वित्तीय संस्थान भारत की विकास गाथा में दीर्घकालिक भागीदार बनना चाहते हैं।

क्यों आ रहा है इतना भारी निवेश
विशेषज्ञों के अनुसार, इस भारी निवेश के पीछे सबसे बड़ा कारण घरेलू वित्तीय संस्थानों की बेहतर तैयारी है। पिछले कुछ वर्षों में—

ऋणमुक्ति (Deleveraging)
सरकारी पुनर्पूंजीकरण
सख्त नियामकीय निगरानी

के चलते भारतीय बैंक और NBFCs 2025 में मजबूत बैलेंस शीट और पर्याप्त पूंजी आधार के साथ खड़े हैं।

जोखिम नहीं, स्थिर वृद्धि की तलाश
वैश्विक निवेशक अब उच्च जोखिम वाले बाजारों के बजाय पूर्वानुमानित और स्थिर वृद्धि वाले गंतव्यों की तलाश में हैं। भारत का BFSI सेक्टर इस कसौटी पर पूरी तरह खरा उतरता है, जहां ऋण मांग, डिजिटल फाइनेंस और वित्तीय समावेशन की संभावनाएं लगातार बढ़ रही हैं।

भारत बना दीर्घकालिक निवेश का केंद्र
2025 में आए निवेश ने यह स्पष्ट कर दिया है कि भारत का BFSI सेक्टर अब केवल उभरता बाजार नहीं, बल्कि वैश्विक वित्तीय रणनीति का अहम स्तंभ बन चुका है। आने वाले वर्षों में भी इस क्षेत्र में बड़े और रणनीतिक निवेश जारी रहने की उम्मीद जताई जा रही है।

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