EV बैटरी के लिए ‘आधार’ जैसा डिजिटल सिस्टम लाने की तैयारी, हर बैटरी को मिलेगा यूनिक पहचान नंबर

देश में इलेक्ट्रिक वाहनों की संख्या तेजी से बढ़ने के साथ सरकार अब उनकी बैटरियों की ट्रैकिंग, रिसाइक्लिंग और पर्यावरणीय असर को लेकर सख्त और पारदर्शी व्यवस्था बनाने की तैयारी में है। सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH) ने इलेक्ट्रिक वाहन बैटरियों के लिए ‘बैटरी पैक आधार सिस्टम’ (Battery Pack Aadhaar System) लागू करने का प्रस्ताव रखा है। इसके तहत हर EV बैटरी को एक यूनिक 21 अंकों का डिजिटल पहचान नंबर दिया जाएगा, जिससे उसकी पूरी जीवन-यात्रा को ट्रैक किया जा सकेगा।

हर बैटरी को मिलेगा यूनिक BPAN नंबर
प्रस्तावित दिशानिर्देशों के अनुसार, बाजार में लाई जाने वाली हर EV बैटरी या स्वयं उपयोग में ली जाने वाली बैटरी के लिए निर्माता या आयातक को एक यूनिक Battery Pack Aadhaar Number (BPAN) जारी करना अनिवार्य होगा। यह नंबर बैटरी पर ऐसी जगह अंकित किया जाएगा, जो स्पष्ट रूप से दिखाई दे और आसानी से खराब या नष्ट न हो सके।

मंत्रालय का कहना है कि यह सिस्टम EV बैटरियों की एंड-टू-एंड ट्रेसेबिलिटी सुनिश्चित करने के लिए एक डिजिटल डेटा बैकबोन का काम करेगा।

किन बैटरियों पर होगा लागू
नोटिफिकेशन के मुताबिक, निम्नलिखित बैटरी श्रेणियों को बैटरी पैक आधार का इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड रखना होगा—

L कैटेगरी के इलेक्ट्रिक वाहन बैटरियां
M और N कैटेगरी के इलेक्ट्रिक वाहन बैटरियां
2 kWh से अधिक क्षमता वाली औद्योगिक बैटरियां

ये सभी बैटरियां बैटरी वेस्ट मैनेजमेंट रूल्स, 2022 के दायरे में आती हैं, जिन्हें पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने अधिसूचित किया है।

बैटरी आधार में क्या-क्या जानकारी होगी दर्ज
बैटरी पैक आधार सिस्टम में बैटरी से जुड़ी कई अहम जानकारियां डिजिटल रूप से दर्ज की जाएंगी, जिनमें शामिल हैं—

  1. बैटरी निर्माता पहचान (Battery Manufacturer Identifier)
  2. बैटरी विवरण सेक्शन
  3. यूनिक बैटरी पहचान संख्या
  4. बैटरी में इस्तेमाल सामग्री की जानकारी
  5. बैटरी का कार्बन फुटप्रिंट
  6. बैटरी के उपयोग से जुड़ा डायनामिक डेटा

सरकार का कहना है कि इससे बैटरी की परफॉर्मेंस, पर्यावरणीय प्रभाव और रिसाइक्लिंग प्रक्रिया की सटीक निगरानी संभव हो सकेगी।

रिसाइक्लिंग और सर्कुलर इकॉनमी को मिलेगा बढ़ावा
मंत्रालय के अनुसार, यह यूनिक पहचान प्रणाली कच्चे माल की खुदाई से लेकर निर्माण, उपयोग, रिसाइक्लिंग और अंतिम निपटान तक बैटरी के पूरे जीवनचक्र को ट्रैक करने में मदद करेगी। इससे बैटरी इकोसिस्टम में पारदर्शिता, जवाबदेही और टिकाऊपन को बढ़ावा मिलेगा।

बैटरी पैक आधार का डेटा बैटरी वैल्यू चेन से जुड़े अन्य हितधारकों के लिए भी एक साझा संसाधन के रूप में काम करेगा, जिन्हें रिपोर्टिंग करनी होती है या जो इस जानकारी तक पहुंच बनाना चाहते हैं।

AIS फ्रेमवर्क से होगा लागू
MoRTH ने संकेत दिया है कि बैटरी पैक आधार सिस्टम को ऑटोमोटिव इंडस्ट्री स्टैंडर्ड (AIS) के तहत लागू किया जाएगा। इसके लिए ऑटोमोटिव इंडस्ट्री स्टैंडर्ड्स कमेटी (AISC) के माध्यम से बहु-स्तरीय मानकीकरण प्रक्रिया अपनाई जाएगी। इससे सभी हितधारकों से परामर्श, तकनीकी सत्यापन और मौजूदा ऑटोमोटिव नियमों के साथ तालमेल सुनिश्चित किया जा सकेगा। मंत्रालय को इस विषय पर गठित समिति की रिपोर्ट का भी इंतजार है, जिसके बाद इसे औपचारिक रूप से लागू करने की प्रक्रिया तेज होगी।

EV सेक्टर के लिए अहम कदम
विशेषज्ञों का मानना है कि यह पहल EV बैटरी के अनियंत्रित निपटान, फर्जीवाड़े और पर्यावरणीय जोखिमों पर अंकुश लगाने में अहम भूमिका निभा सकती है। साथ ही, यह भारत में इलेक्ट्रिक मोबिलिटी को अधिक सुरक्षित, पारदर्शी और टिकाऊ बनाने की दिशा में बड़ा कदम साबित हो सकती है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *