FY26 में केंद्र के अप्रत्यक्ष कर दबाव में, कस्टम ड्यूटी संग्रह 7% से ज्यादा घटा, CGST भी लक्ष्य से पीछे

केंद्र सरकार के राजस्व मोर्चे पर चुनौतियां गहराती नजर आ रही हैं। जहां हाल के महीनों में आयकर और प्रत्यक्ष कर संग्रह में गिरावट चर्चा में रही है, वहीं अब अप्रत्यक्ष करों के मोर्चे पर भी दबाव साफ दिखने लगा है। वित्त वर्ष 2025-26 के पहले आठ महीनों (अप्रैल से नवंबर 2025) के आंकड़े बताते हैं कि कस्टम ड्यूटी और CGST दोनों ही बजटीय अनुमानों से पीछे चल रहे हैं, जिससे राजकोषीय संतुलन पर असर पड़ने की आशंका बढ़ गई है।

कस्टम ड्यूटी संग्रह में 7.3% की गिरावट
कंट्रोलर जनरल ऑफ अकाउंट्स (CGA) के आंकड़ों के बिजनेसलाइन विश्लेषण के अनुसार, अप्रैल-नवंबर 2025 के दौरान कस्टम ड्यूटी से केंद्र को ₹1.43 लाख करोड़ का राजस्व मिला। यह पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि (FY25) के ₹1.54 लाख करोड़ की तुलना में 7.3 प्रतिशत कम है।

वर्तमान में कस्टम ड्यूटी केंद्र के सकल कर राजस्व का लगभग 6.1 प्रतिशत हिस्सा है। FY26 के केंद्रीय बजट में कस्टम ड्यूटी से 2.13 प्रतिशत वृद्धि का अनुमान लगाया गया था, लेकिन अब तक की गिरावट को देखते हुए यह लक्ष्य हासिल होना मुश्किल माना जा रहा है।

टैरिफ रेशनलाइजेशन बना बड़ी वजह
चार्टर्ड अकाउंटेंट नेहा बेरीवाला, पार्टनर, एस के पतोदिया एंड एसोसिएट्स एलएलपी के अनुसार, कस्टम ड्यूटी में कमी की एक बड़ी वजह पिछले कुछ बजटों में किया गया टैरिफ रेशनलाइजेशन है। उनका कहना है कि इससे प्रभावी शुल्क दरें कम हुई हैं, जबकि आयात की मात्रा अपेक्षाकृत स्थिर बनी हुई है। आगे चलकर कस्टम ड्यूटी में स्थायी वृद्धि अब सख्त अनुपालन से नहीं, बल्कि घरेलू मांग और अंतरराष्ट्रीय व्यापार में सुधार पर निर्भर करेगी।

CGST की रफ्तार भी धीमी
अप्रत्यक्ष करों में दूसरा बड़ा स्तंभ CGST भी FY26 में अपेक्षाओं पर खरा नहीं उतरता दिख रहा है। अप्रैल-नवंबर 2025 के दौरान CGST संग्रह में सिर्फ 5.4 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई, जबकि बजट में 10.9 प्रतिशत वृद्धि का अनुमान लगाया गया था। ग्रांट थॉर्नटन भारत के टैक्स कंट्रोवर्सी मैनेजमेंट लीडर मनोज मिश्रा के मुताबिक, GST 2.0 फ्रेमवर्क के तहत किए गए GST दरों के युक्तिकरण के कारण कई वस्तुओं और सेवाओं पर कर भार घटा है। यही वजह है कि CGST की वृद्धि पहले के वर्षों की दोहरे अंकों की रफ्तार से नीचे आ गई है। उनके अनुसार, वित्त वर्ष के आखिरी महीनों में असाधारण उछाल के बिना CGST का बजटीय लक्ष्य हासिल करना कठिन होगा।

एक्साइज ड्यूटी ने बदली तस्वीर
अप्रत्यक्ष करों में जहां कस्टम और CGST दबाव में हैं, वहीं केंद्रीय उत्पाद शुल्क (Union Excise Duty) ने उलट रुख दिखाया है। अप्रैल-नवंबर 2025 के दौरान एक्साइज ड्यूटी संग्रह में 9.25 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई, जो FY26 के बजट में अनुमानित 3.9 प्रतिशत वृद्धि से काफी अधिक है।

यह सुधार 7 अप्रैल 2025 को पेट्रोलियम उत्पादों पर एक्साइज ड्यूटी बढ़ाए जाने के बाद देखने को मिला। इससे तीन साल से जारी एक्साइज राजस्व में गिरावट का सिलसिला टूटा और यह कर फिर से केंद्र के अप्रत्यक्ष कर संग्रह में अहम योगदानकर्ता बन गया।

नीति-आधारित अप्रत्यक्ष कर मॉडल की ओर संकेत
विशेषज्ञों का मानना है कि मौजूदा रुझान संकेत देते हैं कि भारत का अप्रत्यक्ष कर ढांचा अब एक अधिक कैलिब्रेटेड और नीति-आधारित राजस्व मॉडल की ओर बढ़ रहा है। इसमें कर संग्रह की स्थिरता भविष्य में घरेलू मांग को बनाए रखने, व्यापारिक गतिविधियों में सुधार और कर नीतियों को आर्थिक विकास के साथ संतुलित रखने पर निर्भर करेगी।

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