किसान उत्पादक संगठनों के लिए सरकार पांच वर्ष तक बढ़ाएगी योजना
मुंबई- सरकार किसान उत्पादक संगठनों (एफपीओ) के लिए केंद्रीय योजना को पांच और वर्षों (2026 से 31 तक) के लिए बढ़ाएगी। इससे उन कमियों को दूर किया जा सकेगा जिनके कारण इनके संचालन में बाधा आ रही है। कृषि सचिव देवेश चतुर्वेदी ने शुक्रवार को कहा, फरवरी 2020 में 10,000 एफपीओ गठित करने के लक्ष्य के साथ शुरू की गई इस योजना को अगले वित्त आयोग चक्र के लिए बढ़ाने की जरूरत है।
उन्होंने कहा, 10,000 एफपीओ गठित किए जा चुके हैं। वित्त वर्ष 2024-25 में 9,000 करोड़ रुपये का संचयी वार्षिक कारोबार हासिल किया है, लेकिन उन्हें मार्गदर्शन की जरूरत है। इनमें से कई पिछले दो वर्षों में गठित हुए हैं। इसलिए हमें सामुदायिक संगठनों और कार्यान्वयन एजेंसियों के साथ मिलकर उनका मार्गदर्शन करना होगा। मंत्रालय ने एफपीओ को सफल बनाने में आने वाली व्यावहारिक कठिनाइयों की पहचान की है। इनमें क्षमता निर्माण और पूंजी ऋण तक पहुंच शामिल हैं।
चतुर्वेदी ने कहा, हम इन्हें नई योजना में शामिल करने का प्रयास करेंगे ताकि ये किसानों को रिटर्न देने में अत्यंत कुशल, ऊर्जावान और गतिशील बन सकें। विभाग ने कॉरपोरेट मामलों के मंत्रालय से शुरुआती 3-5 वर्षों के दौरान जुर्माने में छूट देने का अनुरोध किया है। अनुपालन आवश्यक है, लेकिन उनके लिए जुर्माना कम किया जा सकता है। जब वे मजबूत हो जाएंगे, तो वे नियमों का अनुपालन कर सकेंगे।
52 लाख किसानों तक पहुंच
चतुर्वेदी ने कहा, कुल कारोबार 10,000 करोड़ रुपये तक पहुंच सकता है। इन एफपीओ ने 12-13 करोड़ किसानों में से 52 लाख किसानों तक अपनी पहुंच बनाई है। सरकार या निजी संस्थाओं के साथ अलग से पंजीकृत 40,000-50,000 एफपीओ को मिलाकर एफपीओ की कुल संख्या व्यक्तिगत किसान पंजीकरणों से कहीं अधिक है। वर्किंग कैपिटल एक गंभीर मुद्दा बना हुआ है। वर्तमान इक्विटी अनुदान में मिलान अनुदान तो दिया जाता है, लेकिन बड़े पैमाने के संचालन के लिए 30 लाख रुपये की सीमा अपर्याप्त है।
एक करोड़ तक की हो सीमा
चतुर्वेदी ने कहा, यह कम से कम 50 लाख रुपये से 1 करोड़ रुपये तक होनी चाहिए। खासकर जब हम एफपीओ को फसल खरीद में लगाना चाहते हैं या किसानों को प्रसंस्करण और मूल्यवर्धन के लिए अग्रिम भुगतान देना चाहते हैं। सरकार एफपीओ को क्रेडिट गारंटी या वर्किंग कैपिटल सुविधाएं देने के लिए प्रणालियों पर विचार कर रही है। हमें हर साल यह सुनिश्चित करना होगा कि एफपीओ के पास अनुपालनों को पूरा करने की क्षमता हो।

