ग्रामीण क्षेत्रों में मांग से 9 फीसदी तक बढ़ सकती है एफएमसीजी की वृद्धि दर

मुंबई- देश के ग्रामीण क्षेत्रों में मांग के दोबारा लौटने और शहरी क्षेत्रों में मांगों में वृद्धि जारी रहने के कारण चालू वित्त वर्ष में एफएमसीजी क्षेत्र की आय वृद्धि 7 से 9 फीसदी रह सकती है। 77 एफएमसीजी कंपनियों पर क्रिसिल के अध्ययन से पता चला है कि फूड और बेवरेज सेगमेंट में कच्चे माल की कीमत में 9 फीसदी तक का इजाफा हुआ है।

क्रिसिल की बृहस्पतिवार को जारी रिपोर्ट में कहा गया है कि कच्चे माल की कीमतों में बढ़त से उत्पादों के भी दाम बढ़ेंगे। पर्सनल केयर और होम केयर सेगमेंट में कच्चे माल की कीमत स्थिर रहेगी। क्रिसिल रेटिंग्स के निदेशक आदित्य झावेर ने कहा कि हमें उम्मीद है कि वित्त वर्ष 2025 में 6 से 7 फीसदी की वॉल्यूम वृद्धि दर ग्रामीण क्षेत्र से देखने को मिल सकती है। रोजाना उपयोग वाली वस्तुओं (एफएमसीजी) की कुल आय का 40 फीसदी हिस्सा ग्रामीण क्षेत्र से आता है। इसकी वजह फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य में वृद्धि और अच्छे मानसून का होना है।

रिपोर्ट के अनुसार, सरकार द्वारा प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण (पीएमएवाई-जी) के तहत ग्रामीण इन्फ्रास्ट्रक्चर पर अधिक खर्च किए जाने के कारण गांवों की बचत को सहारा मिल रहा है। लोग अधिक खर्च कर पा रहे हैं। चालू वित्त वर्ष में शहरी क्षेत्र में वॉल्यूम वृद्धि 7 से 8 फीसदी रह सकती है। इसकी वजह खर्च योग्य आय में बढ़ोतरी होना है। कंपनियों का फोकस विशेषकर पर्सनल केयर और होम केयर में प्रीमियम ऑफरिंग पर है। इससे पर्सनल केयर सेगमेंट 6 से 7 फीसदी की दर से बढ़ सकता है।

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