सरकारी कर्मचारियों के लिए ग्रुप इंश्योरेंस स्कीम के तहत ईपीएफओ कटौती बंद

मुंबई-कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) ने 1 सितंबर, 2013 के बाद नौकरी जॉइन करने वाले सरकारी कर्मचारियों के लिए ग्रुप इंश्‍योरेंस स्‍कीम (GIS) के तहत कटौती बंद करने का फैसला किया है।

इस फैसले के बारे में 21 जून को EPFO ने एक सर्कुलर जारी करके बताया। इससे इन कर्मचारियों को सैलरी में बढ़ोतरी का फायदा होगा। साथ ही उन्हें सितंबर 2013 से अब तक की गई कटौती की रकम भी वापस मिलेगी। EPFO ने अपने सर्कुलर में कहा है, ‘यह निर्देश दिया जाता है कि 1.9.2013 के बाद EPFO जॉइन करने वाले सभी कर्मचारियों के वेतन से GIS के तहत की जा रही कटौती को तुरंत बंद कर दिया जाए।

यह फैसला उन सभी सरकारी कर्मचारियों पर लागू नहीं होगा जो 1 सितंबर, 2013 से पहले EPFO में शामिल हुए थे। टैक्स और बिजनेस कंसल्टेंसी कंपनी ग्रांट थॉर्नटन भारत के पार्टनर अखिल चांदना के मुताबिक, 1 सितंबर 2013 के बाद EPFO जॉइन करने वाले कर्मचारी अब GIS के दायरे में नहीं आएंगे। उनके वेतन से पहले ही की गई कोई भी कटौती उन्हें वापस कर दी जाएगी।

विशेषज्ञों का कहना है कि जिन सरकारी कर्मचारियों के लिए GIS बंद कर दिया गया है, उनकी सैलरी में बढ़ोतरी होगी। चांदना कहते हैं, GIS के तहत कटौती बंद होने से टेक-होम सैलरी में वास्तव में बढ़ेगी। पहले, GIS को फंड करने के लिए कर्मचारियों के मासिक वेतन से उनके वेतनमान के अनुसार कटौती की जाती थी। इन कर्मचारियों के लिए अब यह योजना लागू नहीं होने से कटौती बंद हो जाएगी। उन्हें अधिक नेट-इन-हैंड सैलरी मिलेगी।

हालांकि, यह अभी स्पष्ट नहीं है कि सैलरी में कितनी बढ़ोतरी होगी। सर्किल ऑफ काउंसिल (लॉ फर्म) की सीनियर पार्टनर जैस्मीन दामकेवाला कहती हैं कि GIS के लिए कटौती न होने से कर्मचारियों की टेक होम सैलरी में बढ़ोतरी होगी। हालांकि, असली बात यह देखना होगा कि यह कदम पात्र कर्मचारियों के मासिक वेतन में कितना फर्क डालेगा। हर महीने वेतन का एक छोटा सा प्रतिशत के रूप में कटने वाली यह रकम रिटायरमेंट के समय वर्षों तक एक बड़ी एकमुश्त राशि बन जाती है।

सैलरी में बढ़ोतरी के अलावा इन कर्मचारियों को 1 सितंबर, 2013 के बाद या जॉइनिंग के बाद (जो भी पहले हो) की गई कटौती के बदले में एकमुश्त राशि भी मिलेगी। EPFO सर्कुलर में कहा गया है, ‘इसके अलावा, ऐसे मामलों में अब तक की गई कटौती कर्मचारियों को वापस की जानी है।’

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