बीमा कंपनियां अब यूलिप को निवेश प्रोडक्ट का विज्ञापन नहीं कर पाएंगी

मुंबई- विनियामक एवं विकास प्राधिकरण (IRDAI) ने एक मुख्य परिपत्र जारी कर ‘यूनिट लिंक्ड बीमा योजनाओं’ (यूलिप) को ‘इन्वेस्टमेंट प्रोडक्ट’ के रूप में प्रचारित करने पर रोक लगा दी है। इरडा के 19 जून के परिपत्र में कहा गया कि ‘यूनिट-लिंक्ड’ या ‘इंडेक्स-लिंक्ड’ बीमा उत्पादों को ‘निवेश उत्पाद’ के रूप में विज्ञापित नहीं किया जाएगा।

बीमा कंपनियों को स्पष्ट रूप से यह बताना होगा कि बाजार से जुड़ी बीमा योजनाएं पारंपरिक बंदोबस्ती पॉलिसियों से भिन्न हैं और उनमें जोखिम भी होता है। इसी तरह, भाग लेने वाली (बोनस के साथ) बंदोबस्ती पॉलिसियों को पहले ही यह बताना होगा कि मुनाफे में अनुमानित बोनस की गारंटी नहीं है।

इरडा ने कहा कि परिवर्तनीय वार्षिकी भुगतान विकल्प के साथ लिंक्ड बीमा उत्पादों और वार्षिकी उत्पादों के सभी विज्ञापनों में जोखिम कारकों का खुलासा किया जाएगा। यूलिप एक ऐसा लाइफ इंश्योरेंस प्रोडक्ट है जहां बीमा कवर के साथ साथ निवेश (investment) का फायदा भी निवेशकों को मिलता है। इस स्कीम के तहत जो धनराशि बतौर प्रीमियम आप चुकाते हैं उसके एक हिस्से का इस्तेमाल बीमा कंपनी आपको बीमा कवरेज प्रदान करने के लिए करती है, जबकि बाकी धनराशि का इस्तेमाल इक्विटी या डेट फंड की खरीद में करती है।

यूलिप में रिटर्न की कोई गारंटी नहीं होती है। इसकी वजह है कि इस स्कीम के तहत निवेश इक्विटी (शेयर), डेट या मनी मार्केट इंस्ट्रूमेंट्स में किया जाता है और इसके एवज में म्युचुअल फंड की तरह आपको यूनिट्स मिल जाती है। ऐसे में रिटर्न मार्केट के उतार-चढ़ाव पर निर्भर करता है। हालांकि आप तय कर सकते हैं कि आपका कितना पैसा शेयर में और कितना डेट /मनी मार्केट इंस्ट्रूमेंट्स में लगे। चाहें तो आप अपने निवेश की अधिकतम राशि को इक्विटी फंड में लगा सकते हैं। इससे आपको लॉन्ग-टर्म मसलन 10-15 वर्षों के बाद बेहतर रिटर्न मिल सकता है।

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