आरबीआई ने मई तक खरीदा 28 टन सोना, जानिए इसके दाम में उछाल क्यों

मुंबई- दुनियाभर के सेंट्रल बैंक तेजी से सोना खरीद रहे हैं। आरबीआई (RBI) भी इसमें पीछे नहीं है। मई तक केंद्रीय बैंक 28 टन सोना खरीद चुका है। मई में बैंक ने तीन टन सोना खरीदा। उससे पहले अप्रैल में केंद्रीय बैंक ने करीब छह टन सोना खरीदा और सात बिलियन डॉलर मूल्य की अमेरिकी ट्रेजरी सिक्योरिटीज बेच दी।

आरबीआई अपने विदेशी मुद्रा भंडार मैनेजमेंट में विविधता ला रहा है। अमेरिकी ट्रेजरी विभाग के हाल में जारी आंकड़ों के अनुसार आरबीआई की होल्डिंग्स में अमेरिकी ट्रेजरी सिक्योरिटीज की वैल्यू अप्रैल में 7.1 अरब डॉलर घटकर 233.5 अरब डॉलर रह गया। इसकी तुलना में, भारत ने पिछले साल अप्रैल में लगभग एक अरब डॉलर मूल्य की अमेरिकी ट्रेजरी सिक्योरिटीज खरीदी थी।

आरबीआई की रणनीति दुनिया के दूसरे प्रमुख केंद्रीय बैंकों की स्ट्रैटजी के अनुरूप है। भू-राजनीतिक तनाव बढ़ने से ये बैंक अपने भंडार में सोने की मात्रा बढ़ा रहे हैं और डॉलर वाली एसेट्स का हिस्सा कम कर रहे हैं। ताजा आंकड़ों के मुताबिक विदेशी केंद्रीय बैंकों ने अमेरिकी ट्रेजरी सिक्योरिटीज में अपना एक्सपोजर 30 अरब डॉलर तक कम कर दिया है।

दूसरी ओर, वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल के आंकड़ों से पता चलता है कि जनवरी-मार्च तिमाही में वैश्विक स्तर पर केंद्रीय बैंकों ने रिकॉर्ड 290 टन सोना खरीदा। इस दौरान चीन और तुर्की के केंद्रीय बैंकों ने सबसे ज्यादा खरीदारी की। आरबीआई ने दिसंबर 2017 से बाजार से नियमित रूप से सोने की खरीदारी शुरू की थी। लेकिन यूक्रेन युद्ध और पश्चिम एशिया में तनाव से पिछले दो वर्षों में बैंक इसमें तेजी लाया है।

इस साल जनवरी से मई तक आरबीआई 28 टन सोना खरीद चुका है। वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल द्वारा 2024 में कराए गए एक सर्वेक्षण के मुताबिक केंद्रीय बैंकों के सोना खरीदने के तीन मुख्य कारण हैं। पहला कारण है सोने की लॉन्ग टर्म वैल्यू। दूसरी वजह यह है कि संकट के समय हमेशा सोने की चमक बढ़ी है। तीसरी वजह यह है कि पोर्टफोलियो डाइवर्सिफायर के रूप में इसकी कारगर भूमिका रही है।

आरबीआई स्ट्रैटजिक मूव के तौर पर अपने भंडार में सोने की मात्रा बढ़ा रहा है। इसे महंगाई और फॉरेन करेंसी रिस्क में हेज के रूप में देखा जाता है। आरबीआई गवर्नर शक्तिकांत दास ने 5 अप्रैल को नीतिगत समीक्षा के बाद मीडिया कॉन्फ्रेंस में कहा था कि इस तरह के फैसलों में सभी पहलुओं का ध्यान रखा जाता है।

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