बजट में व्यक्तिगत कर दरों में हो सकती है कटौती, खपत को बढ़ाने की योजना

मुंबई- सरकार जुलाई में पेश होने वाले पूर्ण बजट में कुछ श्रेणियों के व्यक्तियों के लिए व्यक्तिगत कर दरों को कम करने पर विचार कर रही है। इससे देश में खपत को बढ़ावा देने में मदद मिल सकती है। चुनाव बाद सर्वेक्षण से पता चला कि मतदाता महंगाई, बेरोजगारी और घटती आय को लेकर चिंतित थे। हालांकि, 2023-24 में देश की अर्थव्यवस्था 8.2 फीसदी की दर से बढ़ी थी।

कर कटौती से सरकार को कर आय के किसी भी नुकसान की भरपाई इस श्रेणी के आय अर्जित करने वालों की बढ़ती खपत से आंशिक रूप से की जा सकती है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) ने तीसरी बार सत्ता में वापसी की है। हालांकि, महंगाई, बेरोजगारी और घटती आय के कारण इस बार राजग में सबसे बड़ी पार्टी भाजपा को बहुमत नहीं मिला है।

व्यक्तिगत कर में कटौती से अर्थव्यवस्था में खपत को बढ़ावा मिल सकता है। साथ ही, मध्यम वर्ग की बचत बढ़ सकती है। इसमें 15 लाख रुपये सालाना कमाने वाले व्यक्तियों को कर राहत मिलने की उम्मीद है। 15 लाख रुपये तक की वार्षिक आय पर 5 से 20 तक का कर लगाया जाता है। 15 लाख रुपये से अधिक की कमाई पर 30 फीसदी कर लगाया जाता है।

जब किसी व्यक्ति की आय 3 लाख से पांच गुना बढ़कर 15 लाख रुपये होती है तो व्यक्तिगत कर की दर छह गुना बढ़ जाती है। इससे लोग परेशान हो जाते हैं। सरकार 10 लाख रुपये की वार्षिक आय के लिए भी व्यक्तिगत कर दरों को कम करने पर भी विचार कर सकती है। पुरानी कर प्रणाली के तहत 30 फीसदी की उच्चतम दर पर आयकर के लिए एक नई सीमा पर चर्चा की जा रही है।

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