भारत सरकार के नए कानून से मेटा, एपल और गूगल जैसी पर कसेगी नकेल

मुंबई- भारत सरकार एक नए कानून पर विचार कर रही है जो टेक्नॉलॉजी कंपनियों जैसे Apple, Google और Meta के लिए सख्त नियम लागू करेगा। यह यूरोपीय संघ के नियमों जैसा होगा और इन कंपनियों के कारोबार के तरीके को बदल सकता है।

अमेरिका का एक बड़ा व्यापारिक संगठन इस कानून का विरोध कर रहा है क्योंकि उसे लगता है कि इससे इन कंपनियों को नुकसान होगा। इस नए कानून को “डिजिटल कंप्टीशन बिल” कहा जाता है और इसका मकसद मौजूदा नियमों के साथ मिलकर बाजार में हेल्दी कंपटीशन को बढ़ावा देना है।

भारत सरकार बड़ी टेक कंपनियों को नियंत्रित करने के लिए यूरोपीय संघ के नियमों से प्रेरित होकर एक नए कानून “डिजिटल कंप्टीशन बिल” लाने पर विचार कर रही है। यह कानून उन कंपनियों पर लागू होगा जिन्हें “डिजिटल रूप से महत्वपूर्ण” माना जाता है।

इनमें वे कंपनियां शामिल हैं जिनकी भारत में सालाना कमाई 3600 करोड़ रुपये से अधिक है, या वैश्विक कमाई 225,000 करोड़ रुपये से अधिक है, साथ ही जिनके भारत में कम से कम 10 करोड़ उपभोक्ता हैं। अभी तक इस कानून को संसद की मंजूरी नहीं मिली है, लेकिन माना जा रहा है कि Apple, Google, Meta और Amazon जैसी बड़ी कंपनियां इसके दायरे में आ सकती हैं।

यह कानून उन कंपनियों पर लागू होगा जिन्हें “डिजिटल रूप से महत्वपूर्ण” माना जाता है। इनमें वे कंपनियां शामिल हैं जिनकी भारत में सालाना कमाई 3600 करोड़ रुपये से अधिक है, या वैश्विक कमाई 225,000 करोड़ रुपये से अधिक है, साथ ही जिनके भारत में कम से कम 10 करोड़ उपभोक्ता हैं।
अभी तक इस कानून को संसद की मंजूरी नहीं मिली है, लेकिन माना जा रहा है कि Apple, Google, Meta और Amazon जैसी बड़ी कंपनियां इसके दायरे में आ सकती हैं।

भारत सरकार का कहना है कि डिजिटल बाजार में कुछ बड़ी कंपनियों का बहुत ज्यादा दबदबा बन गया है। ये कंपनियां पूरे बाजार को नियंत्रित कर रही हैं, जिससे छोटी कंपनियों और नए कारोबारों के लिए मुश्किल हो जाती है। सरकार इस असंतुलन को कम करना चाहती है ताकि बाजार में हेल्दी कंपटीशन बना रहे। इसीलिए वो एक नया कानून ला रही है।

कई टेक कंपनियां पहले से ही भारत सरकार की जांच के घेरे में हैं। मिसाल के तौर पर, अमेज़न और फ्लिपकार्ट (जो वॉलमार्ट की कंपनी है) पर आरोप है कि वे अपने ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म पर कुछ खास विक्रेताओं को ज्यादा फायदा दे रही हैं, जिससे बाकी कंपनियों को नुकसान हो रहा है।

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