सांसद से एचडीएफसी लाइफ ने की ठगी, अब देना होगा 10 लाख रुपये जुर्माना

मुंबई-फिल्मी दुनिया से संसद तक पहुंची अभिनेत्री सुमालता अंबरीश भी ठगी की शिकार हो गईं। उन्हें बीमा पॉलिसी में अच्छे रिटर्न का वादा करते हुए एक बीमा एजेंट ने ठग लिया। जब उन्हें समय पर बताया गया रिटर्न नहीं मिला तो उसने कंपनी से पूछताछ की। कंपनी ने उन्हें ही दोषी ठहरा दिया कि वह पढ़े-लिखे होते हुए कागज पर ऐसे ही हस्ताक्षर कर दिया। उसके बाद उन्होंने कंज्यूमर फोरम का दरवाजा खटखटाया। वहां से बीमा कंपनी को 10 लाख रुपये का हर्जाना देने का भी आदेश हुआ।

फिल्म अभिनेत्री सुमालता साल 2019 में ही एमपी बनी थीं। उन्होंने कुछ साल पहले एचडीएफसी लाइफ की एक योजना में 40 लाख रुपये का निवेश किया था। निवेश करते वक्त एजेंट विशालाक्षी भट्ट ने बताया कि उन्हें नौ फीसदी का सालाना रिटर्न मिलेगा। सुमालता ने 15 मई 2015 को 40 लाख रुपये का चेक इस विश्वास के साथ जारी किया था कि नवंबर 2016 तक उसे 43.60 लाख रुपये मिलेंगे। लेकिन उन्हें ऐसा रिटर्न नहीं मिला। इसके बाद उन्होंने कंपनी के दफ्तर में संपर्क किया। उन्हें तब आश्चर्य हुआ, जब एचडीएफसी लाइफ के एक कर्मचारी ने उन्हें सूचित किया कि विशालाक्षी धोखाधड़ी में शामिल थी और उसने ग्राहकों के धन का दुरुपयोग किया था।

जब सुमालता ने एचडीएफसी लाइफ (HDFC Life) कार्यालय का दौरा किया, तो उसे एहसास हुआ कि विशालाक्षी ने उसे गुमराह किया था। उसने फिक्स्ड डिपॉजिट के बजाय पेंशन पॉलिसी में पैसा निवेश किया था। इसके बाद सुमलता ने नवंबर 2015 और जनवरी 2016 में बैंक को दो बार पत्र लिखकर सुनिश्चित ब्याज सहित रिफंड का अनुरोध किया। उसने कानूनी नोटिस भी जारी किया, लेकिन उसका पैसा वापस नहीं किया गया।

जब सुमलता ने आयोग से संपर्क किया, तो एचडीएफसी लाइफ ने जवाब दिया कि शिकायतकर्ता एक अच्छी तरह से शिक्षित व्यक्ति है। उन्होंने जिस प्रोपोजल फॉर्म पर उसने हस्ताक्षर किए हैं, उसे देखने पर उसे यह एहसास होना चाहिए था कि यह एक बीमा पॉलिसी है, निवेश नहीं। एचडीएफसी लाइफ ने कहा कि यह शिकायत खारिज किये जाने योग्य है।

आयोग के सदस्य रविशंकर और सुनीता चन्नबसप्पा बागेवाड़ी ने 31 मई को इस मामले पर आदेश पारित कियाा। उन्होंने सुमलता को राहत देते हुए एचडीएफसी लाइफ को साल 2017 से प्रति वर्ष 7.5% ब्याज के साथ उनके द्वारा किए गए 40 लाख रुपये के निवेश को वापस करने का निर्देश दिया। यही नहीं कंपनी को 10 लाख रुपये का हर्जाना और 25,000 रुपये मुकदमा खर्च के रूप में भी भरना होगा। सेवा में कमी के लिए एचडीएफसी लाइफ (पूर्व में एचडीएफसी स्टैंडर्ड लाइफ इंश्योरेंस कंपनी) को जिम्मेदार ठहराते हुए आयोग ने कहा कि एचडीएफसी लाइफ के हलफनामे से यह साबित होता है कि उसके एजेंट विशालाक्षी भट्ट ने शिकायतकर्ता को गुमराह किया था और 9% सालाना ब्याज का आश्वासन देकर उससे 40 लाख रुपये का निवेश करवाया था।

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