रघुराम राजन बोले, मजबूत विपक्ष के लिए बुद्धिमान मतदाताओं की सराहना हो

मुंबई-भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के पूर्व गवर्नर रघुराम राजन ने लोकसभा चुनाव 2024 के नतीजों पर अपनी प्रतिक्रिया दी है। उन्‍होंने इसमें एक मजबूत विपक्ष का चुनाव करने के लिए ‘बुद्धिमान’ भारतीय मतदाताओं की सराहना की है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि चुनाव नतीजे भारतीय लोकतंत्र और इसकी अर्थव्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण जीत हैं।

राजन ने लिंक्डइन पोस्ट में कहा, ‘भारतीय मतदाता ने अपनी बात कह दी है। और यह कितना बुद्धिमानी भरा फैसला है! यह भारतीय लोकतंत्र और भारतीय अर्थव्यवस्था की जीत है। अगले कुछ दिनों में चाहे जो भी हो, हमारे पास एक मजबूत विपक्ष होगा जो सरकार को अपना रास्ता बदलने के लिए मजबूर करेगा।’

4 जून को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सुनिश्चित कर लिया कि वह अपने तीसरे कार्यकाल के लिए तैयार हैं। हालांकि, पिछले दशक के उलट इस बार उन्हें गठबंधन सरकार बनाने के लिए सहयोगियों पर निर्भर रहना होगा। बीजेपी लोकसभा में आवश्यक बहुमत के आंकड़े 272 से 32 सीटें कम रह गई है। एनडीए 291 सीटें जीतने में सफल रहा, जबकि कांग्रेस के नेतृत्व वाले इंडिया ब्लॉक ने 234 सीटें जीतीं। कांग्रेस ने 2019 में 52 सीटों के मुकाबले 99 सीटों पर जीत दर्ज की। जबकि बीजेपी ने 240 सीटें हासिल कीं।

राजन ने रोहित लांबा के साथ मिलकर लिखा एक लेख शेयर किया। इसमें उन्होंने उन कारणों पर रोशनी डाली है कि क्‍यों भारत को अपनी आर्थिक दिशा बदलने की जरूरत है। लेख के मुख्य बिंदु इस प्रकार हैं:

  1. भारत को आर्थिक दिशा में सुधार की जरूरत है। अगर भारतीय जनता पार्टी पर्याप्त बहुमत से जीतती है तो यह बदलाव कम संभव है क्योंकि पार्टी इस जीत को अपनी मौजूदा नीतियों की पुष्टि के रूप में देख सकती है।
  2. वैसे तो भारत की इकनॉमिक ग्रोथ अन्य देशों की तुलना में अधिक प्रतीत होती है। लेकिन, यह पर्याप्त गुणवत्ता वाली नौकरियों का सृजन करने के लिए नाकाफी है। विकास सही क्षेत्रों में नहीं हो रहा है।
  3. भारत युवा राष्ट्र है जहां हर साल 1 करोड़ से ज्‍यादा नौजवान जॉब मार्केट में एंट्री करते हैं। जब चीन और कोरिया जैसे देश समान जनसांख्यिकीय अवस्था में थे तो उन्होंने अपने श्रम बल को सफलतापूर्वक नियोजित किया। भारत की तुलना में तेज विकास का अनुभव किया।
  4. इसके उलट भारत अपने जनसांख्यिकीय लाभांश (पॉपुलेशन डिवडेंड) को बर्बाद करने का जोखिम उठा रहा है। बढ़ती बेरोजगारी, खास तौर पर मध्यम और निम्न-मध्यम वर्गों के बीच अमीर और बाकी आबादी के बीच बढ़ती असमानता को जन्म दे रही है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *