तीन घंटे में बीमा कंपनियों को निपटाना होगा कैशलेस दावा, इरडाई का आदेश

मुंबई- अस्पतालों में कैशलेस बीमा का निपटान अब तीन घंटे के भीतर किया जाएगा। बीमा नियामक भारतीय बीमा नियामक और विकास प्राधिकरण (इरडाई) ने कहा है कि अस्पताल से मरीज के डिस्चार्ज का आवेदन मिलने पर बीमा कंपनियों को तीन घंटे के भीतर दावे का निपटान करना होगा। अगर इसमें देरी हुई तो इस पर चार्ज लगेगा, जो बीमा कंपनी को शेयरधारकों के फंड से देना होगा। इस नियम को तुरंत लागू कर दिया गया है।

बीमा नियामक इरडाई ने कहा, अगर इलाज के दौरान पॉलिसीधारक की मौत हो जाती है तो दावा का तुरंत निपटान करना होगा। साथ ही, शव को तुरंत अस्पताल से रिलीज करना होगा। नियामक ने बीमा कंपनियों से समयबद्ध तरीके से 100 फीसदी कैशलेस दावा निपटान हासिल करने का प्रयास करने को कहा है।

भारतीय बीमा नियामक और विकास प्राधिकरण (इरडाई) ने बुधवार को सर्कुलर में कहा, इमर्जेंसी मामलों में, बीमा कंपनी को आवेदन प्राप्त होने के एक घंटे के भीतर कैशलेस प्राधिकरण के अनुरोध पर तुरंत निर्णय लेना चाहिए। बीमा कंपनियों को 31 जुलाई तक इसके लिए सभी तैयारी करने को कहा है। बीमाकर्ता कैशलेस अनुरोधों से निपटने और सहायता के लिए अस्पताल में सहायता डेस्क की व्यवस्था कर सकते हैं।

नियामक ने बीमा कंपनियों से कहा, डिजिटल माध्यम से पॉलिसीधारक को प्री-अथरॉइजेशन प्रक्रिया शुरू करें। प्री-अथरॉइजेशन का मतलब बीमा कंपनी द्वारा एक प्रारंभिक राशि स्वीकृत की गई है। साथ ही, यह मंजूरी भी दी गई है कि दावे का भुगतान अस्पताल से प्राप्त अंतिम चालान के अधीन किया जाएगा।

नियामक ने कहा, स्वास्थ्य दावों के मामले में प्रोडक्ट मैनेजमेंट कमिटी यानी पीएमसी या इसके तीन सदस्यीय उप-समूह की मंजूरी के बिना कोई भी दावा खारिज नहीं किया जाएगा। यदि दावा खारिज कर दिया जाता है या आंशिक रूप से अस्वीकृत किया जाता है तो पॉलिसी दस्तावेज के विशिष्ट नियमों और शर्तों सहित पूर्ण विवरण के साथ दावेदार को जानकारी दी जाएगा।

इरडाई ने कहा, बीमा कंपनियों द्वारा सभी उम्र, क्षेत्रों, चिकित्सा स्थितियों, सभी प्रकार के अस्पतालों और स्वास्थ्य देखभाल प्रदाताओं के लिए विविध बीमा उत्पादों की पेशकश करनी चाहिए। इसके लिए ज्यादा विकल्प उपलब्ध कराए जाएंगे।

पॉलिसी अवधि के दौरान कोई दावा नहीं होने की स्थिति में बीमा कंपनी पॉलिसीधारकों को बीमा राशि बढ़ाकर या प्रीमियम राशि में छूट देकर ऐसे नो क्लेम बोनस को चुनने का विकल्प प्रदान कर सकती है। पॉलिसीधारकों को प्रभावी, कुशल तरीके से पॉलिसी के नवीनीकरण, पॉलिसी सर्विसिंग और शिकायत निवारण के लिए डिजिटल सुविधा देने की भी सिफारिश की गई है।

इरडाई ने कहा, पॉलिसीधारक को कोई दस्तावेज जमा करने की जरूरत नहीं होगी। बल्कि बीमा कंपनियों और थर्ड पार्टी प्रशासक यानी टीपीए को अस्पतालों से सारे दस्तावेज लेने होंगे।

इरडाई ने कहा, पॉलिसी लेते समय ग्राहक को सारी जानकारी देनी होगी। 30 दिन की समीक्षा अवधि होगी। ग्राहक समीक्षा के बाद किसी नियम से संतुष्ट नहीं है तो वह पॉलिसी को रद्द कर सकता है। सारी जानकारी स्थानीय भाषा में भी देनी होगी। क्षतिपूर्ति आधारित स्वास्थ्य बीमा पॉलिसी को सात दिन का नोटिस देकर रद्द किया जा सकता है। आपातकाल स्थिति में कवरेज से इन्कार नहीं किया जा सकता है।

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