10 साल भारत की बदली रेटिंग, एसएंडपी ने अब बीबीबी-सकारात्मक किया

मुंबई- एसएंडपी ग्लोबल रेटिंग ने भारतीय अर्थव्‍यवस्‍था पर अपने आउटलुक में बदलाव किया है। उसने सॉवरेन रेटिंग आउटलुक को ‘स्थिर’ से बढ़ाकर ‘सकारात्मक’ कर दिया है। मजबूत ग्रोथ, पिछले पांच साल में सार्वजनिक खर्च की बेहतर गुणवत्ता, सुधारों और राजकोषीय नीतियों में निरंतरता की उम्मीद के बीच ऐसा हुआ है।

रेटिंग एजेंसी ने 14 साल बाद भारत के आउटलुक में इस तरह का बदलाव किया है। चुनावी नतीजों से पहले सॉवरेन आउटलुक में यह बदलाव कई लिहाज से महत्‍वपूर्ण है। भारत में छह सप्ताह तक चलने वाला दुनिया का सबसे बड़ा राष्ट्रीय चुनाव अपने अंतिम चरण में है। 4 जून को वोटों की गिनती की जाएगी। निवेशक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के तीसरे कार्यकाल पर दांव लगा रहे हैं।

एसएंडपी ने वैसे भारत की सॉवरेन रेटिंग को निम्नतम इन्‍वेस्‍टमेंट ग्रेड BBB- पर बरकरार रखा है। BBB- सबसे निचली निवेश श्रेणी रेटिंग है। एजेंसी ने पिछली बार 2010 में रेटिंग आउटलुक को ‘नकारात्मक’ से बढ़ाकर ‘स्थिर’ किया था। अमेरिकी एजेंसी ने बुधवार को बयान में कहा कि अगर भारत सतर्क राजकोषीय और मौद्रिक नीति अपनाता है तो सरकार के बढ़े हुए कर्ज और ब्याज के बोझ में कमी आएगी। इससे आर्थिक मोर्चे पर जुझारूपन बढ़ेगा। इसके कारण वह अगले 24 महीने में भारत की साख को बढ़ा सकती है।

एसएंडपी की रेटिंग भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) की ओर से सरकार को 2.10 लाख करोड़ रुपये का रिकॉर्ड डिविडेंड ट्रांसफर करने के एक सप्ताह के भीतर आई है। इस रकम का इस्तेमाल केंद्र के राजकोषीय घाटे को कम करने के लिए किया जा सकता है।

सॉवरेन रेटिंग किसी देश के निवेश आउटलुक के जोखिम स्तर को मापने का एक साधन है। साथ ही निवेशकों को देश की अपना कर्ज चुकाने की क्षमता से अवगत कराती है। निवेशक इन रेटिंग को देश की साख के मापदंड के तौर पर देखते हैं। इसका उधार लेने की लागत पर असर पड़ता है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *