मोदी सरकार को दस साल में आरबीआई ने दिया 8.73 लाख करोड़ का लाभांश

मुंबई- आरबीआई ने वित्त वर्ष 2023-24 के लिए केंद्र सरकार को 2,10,874 करोड़ रुपये के लाभांश भुगतान को मंजूरी दे दी है। यह रकम 2022 23 के 87,416 करोड़ रुपये की तुलना में दोगुना से भी ज्यादा है। इससे सरकार को राजकोषीय घाटा कम करने में मदद मिलेगी। सरकार का लक्ष्य चालू वित्त वर्ष में राजकोषीय घाटे यानी खर्च और प्राप्ति के बीच के अंतर को जीडीपी के 5.1 फीसदी या 17.34 लाख करोड़ रुपये तक सीमित रखना है।

वित्त वर्ष 2024-25 के बजट में सरकार ने आरबीआई और सरकारी वित्तीय संस्थानों से 1.02 लाख करोड़ रुपये की लाभांश आय का अनुमान लगाया था। गवर्नर शक्तिकांत दास की अध्यक्षता में बुधवार को आयोजित आरबीआई के केंद्रीय निदेशक मंडल की 608वीं बैठक में लाभांश भुगतान का निर्णय लिया गया।

आरबीआई बोर्ड ने अकाउंटिंग वर्ष 2018-19 से 2021-22 के दौरान मौजूदा व्यापक आर्थिक स्थितियों और कोविड महामारी के कारण आकस्मिक जोखिम बफर (सीआरबी) को 5.50 प्रतिशत पर बनाए रखने का निर्णय लिया था। 2022-23 में आर्थिक वृद्धि में सुधार होने पर सीआरबी को बढ़ाकर 6.00 प्रतिशत कर दिया गया। अर्थव्यवस्था में मजबूती से सीआरबी को 2023-24 के लिए बढ़ाकर 6.50 प्रतिशत करने का फैसला किया गया है।

आरबीआई को विदेशी मुद्रा परिसंपत्तियों से ब्याज आय में अच्छी वृद्धि हुई है। यह हाल के वर्षों में अमेरिकी फेडरल रिजर्व की आक्रामक ब्याज दरों में बढ़ोतरी से प्रेरित है। विदेशी मुद्रा में भी अच्छी खासी बढ़त हुई है।

आरबीआई की आमदनी का मुख्य जरिया सरकारी बॉन्ड, सोने पर किया गया निवेश और विदेशी मार्केट में फॉरेक्स और बॉन्ड ट्रेडिंग होता है। आरबीआई के पास इस बार रिकॉर्ड सरप्लस था, क्योंकि पिछले साल बैंक ने सोना और विदेशी मुद्रा बाजार में अच्छी कमाई की है। बैंक ने बड़े मुनाफे पर डॉलर बेचे और मुद्रा बाजार में रिकॉर्ड बॉन्ड खरीदे, जिनपर अच्छा रिटर्न मिला है।

आरबीआई के फैसले के तुरंत बाद 10 साल के सरकारी बॉन्ड की ब्याज दर गिरकर एक साल के निचले स्तर पर 6.99 फीसदी पर पहुंच गई। मंगलवार को यह 7.03 फीसदी पर थी। आगे इसमें और गिरावट आ सकती है।

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