मोदी सरकार सत्ता में आई तो एफडीआई नियमों में कुछ क्षेत्रों में मिलेगी ढील

मुंबई- मोदी सरकार तीसरी बार सत्ता में आती है तो कुछ क्षेत्रों में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश यानी एफडीआई में ढील दी जा सकती है। उद्योग संवर्धन और आंतरिक व्यापार विभाग (डीपीआईआईटी) के सचिव राजेश कुमार सिंह ने कहा, कुछ वर्षों में कई क्षेत्रों में एफडीआई नीति को उदार बनाया गया है। भारत की नीतियां दुनिया में सबसे उदार एफडीआई नीतियों में से एक हैं। यह कई दक्षिण पूर्व एशियाई देशों की तुलना में ज्यादा उदार है।

एक कार्यक्रम में सिंह ने कहा, हाल ही में अंतरिक्ष क्षेत्र में एफडीआई मानदंडों को आसान बनाया गया था। इस बात की बहुत संभावना है कि जो भी क्षेत्र बचे हैं और जहां कुछ उदारीकरण संभव है, वहां नई सरकार बनने पर इसके लिए प्रयास कर सकते हैं। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, अप्रैल-दिसंबर 2023 में भारत में एफडीआई 13 प्रतिशत घटकर 32.03 अरब डॉलर रह गया। इसका कारण कंप्यूटर हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर, दूरसंचार, ऑटो और दवा क्षेत्रों में कम निवेश रहा।

सचिव ने कहा, उत्पादन से जुड़ी प्रोत्साहन योजनाओं (पीएलआई) में अब तक 1.13 लाख करोड़ रुपये का निवेश आया है। लाभार्थी कंपनियों ने नौ लाख करोड़ रुपये से अधिक की बिक्री की है। 3.45 लाख करोड़ रुपये का निर्यात किया है। साथ ही आठ लाख से ज्यादा लोगों को नौकरी दी है।

राजेश सिंह के मुताबिक, इलेक्ट्रिक वाहन (ईवी) नीति पर कई ऑटोमोबाइल कंपनियों से अच्छी प्रतिक्रिया की उम्मीद है। नीति में सरकार ने भारत में कोई भी वास्तविक निवेश किए बिना सिर्फ आधार स्थापित करने की प्रतिबद्धता जताकर शुल्क में बदलाव करने की व्यवस्था की है। हर कोई टेस्ला के बारे में बात करता है, लेकिन हम इस नीति पर कई कंपनियों से अच्छी प्रतिक्रिया की उम्मीद कर रहे हैं। केंद्र सरकार हाल में मंजूर ईवी नीति के तहत कंपनियों को नए निवेश के लिए अनुमति देने की योजना बना रही है। भारी उद्योग मंत्रालय विस्तृत दिशानिर्देश तैयार कर रहा है। उद्योग के साथ बातचीत का दूसरा दौर शुरू होने को है।

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