पश्चिमी देशों की कंपनियों के लिए निवेश का स्त्रोत बना भारत- यूएन रिपोर्ट

मुंबई- चीन में विदेशी निवेश कम होने से भारत कई पश्चिमी कंपनी के लिए एक वैकल्पिक गंतव्य बन गया है। इससे भारत की आर्थिक वृद्धि काफी बेहतर हुई है। साथ ही, भारत पश्चिमी कंपनियों के लिए एक वैकल्पिक निवेश स्रोत बन गया है। संयुक्त राष्ट्र यानी यूएन के आर्थिक एवं सामाजिक मामलों के विभाग में वैश्विक आर्थिक निगरानी शाखा के प्रमुख हामिद राशिद ने कहा, इससे भारत को फायदा हो रहा है।

यूएन की ओर से बृहस्पतिवार को जारी रिपोर्ट में भारत की अर्थव्यवस्था के 2024 में 6.9 प्रतिशत और 2025 में 6.6 प्रतिशत की दर से बढ़ने का अनुमान लगाया गया है। जनवरी में 2024 के लिए 6.2 फीसदी का अनुमान था। यह वृद्धि मुख्य रूप से मजबूत सरकारी निवेश और निजी खपत से प्रेरित है।

रिपोर्ट के अनुसार, कमजोर बाहरी मांग का व्यापारिक निर्यात वृद्धि पर असर जारी रहेगा। दवाओं और रसायनों के निर्यात में जोरदार वृद्धि की उम्मीद है। अमेरिका, ब्राजील, भारत तथा रूस सहित कई उभरती अर्थव्यवस्थाओं में बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद जताई गई है। कई बड़ी विकासशील अर्थव्यवस्थाएं – इंडोनेशिया, भारत और मैक्सिको मजबूत घरेलू और बाहरी मांग से लाभान्वित हो रही हैं। 2024 में वैश्विक व्यापार में सुधार की उम्मीद है।

रिपोर्ट में लंबी अवधि तक ऊंची ब्याज दरों, कर्ज चुकाने की चुनौतियों, देशों के बीच तनाव पर भी फोकस किया गया है। दुनिया के सबसे गरीब देशों व छोटे द्वीप देशों के लिए जलवायु का जोखिम भी है। 2023 में महंगाई अपने शीर्ष पर थी। अब यह कम हो रही है। फिर ही वैश्विक अर्थव्यवस्था की कमजोरी का यह प्रमुख कारक है।

भारत में खुदरा महंगाई घटकर 2024 में 4.5 प्रतिशत होने का अनुमान है। यह आरबीआई के दो से छह प्रतिशत के लक्ष्य सीमा के भीतर रहेगी। भारत में मजबूत विकास और उच्च श्रम बल भागीदारी के बीच श्रम बाजार संकेतकों में भी सुधार हुआ है। सरकार पूंजी निवेश बढ़ाने के साथ राजकोषीय घाटे को कम करने के लिए प्रतिबद्ध है।

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