प्रतिबंध से भारतीय मसालों के निर्यात में आ सकती है 40 फीसदी की गिरावट

मुंबई- फेडरेशन ऑफ इंडियन स्पाइस स्टेकहोल्डर्स यानी एफआईएसएस ने कहा है कि अगर निर्यात के लिए जाने वाले मसालों में एथिलीन ऑक्साइड के मुद्दे को जल्द नहीं सुलझाया गया तो वित्त वर्ष 2025 में भारत के मसाला निर्यात में लगभग 40 प्रतिशत की गिरावट आ सकती है। हांगकांग और सिंगापुर ने लोकप्रिय ब्रांड एमडीएच और एवरेस्ट के उत्पादों में कार्सिनोजेनिक रसायन एथिलीन ऑक्साइड का पता चलने के बाद उनकी बिक्री पर प्रतिबंध लगा दिया है।

वित्त वर्ष 2023-24 में भारत का मसाला निर्यात 4.25 अरब डॉलर था। यह वैश्विक मसाला निर्यात का 12 प्रतिशत हिस्सा था। एफआईएसएस के सचिव तेजस गांधी ने कहा, बहुत से निर्यातकों के पास ऑर्डर हैं। लेकिन हालिया विवादों के कारण इनको रोक दिया गया है। दुनिया भर में एथिलीन ऑक्साइड का व्यापक रूप से उपयोग होता है। भारतीय कंपनियां 30 से 40 वर्षों से अमेरिका में इन मसालों का निर्यात कर रही हैं। ऐसे में इसे लेकर गलत आरोप लगाए जा रहे हैं।

संगठन ने कहा, एथिलीन ऑक्साइड कीटनाशक नहीं है। इसका उपयोग केवल अनुमोदित संगठनों द्वारा मसालों से हानिकारक जीवाणु तत्वों को हटाने या नियंत्रित करने के लिए किया जाता है। इस तकनीक का उपयोग दुनिया के अधिकांश हिस्सों में किया जाता है।

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