लोगों की बचत घटकर 5 साल के निचले स्तर पर, देनदारी 73 फीसदी बढ़ गई

मुंबई- देश में घरेलू बचत तीन साल में 9 लाख करोड़ रुपये घट गई है। 2022-23 में यह 14.16 लाख करोड़ रुपये रही है। यह इसका पांच साल का निचला स्तर है। सांख्यिकी व कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय के अनुसार, 2020-21 में यह अपने शीर्ष पर यानी 23.29 लाख करोड़ रुपये रही थी।

आंकड़ों में कहा गया है कि पिछले वित्त वर्ष के पहले घरेलू बचत का निचला स्तर 2017-18 में रहा था, जो 13.05 लाख करोड़ रुपये था। 2018-19 में यह बढ़कर 14.92 लाख करोड़ और 2018-19 में यह 15.49 लाख करोड़ रुपये रहा था। वित्त वर्ष 2020-21 के बाद से लगातार घरेलू बचत में गिरावट आ रही है। 2021-22 में यह कम होकर 17.12 लाख करोड़ रुपये रही थी।

मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक, 2022-23 में म्यूचुअल फंड में निवेश करीब दोगुना होकर 1.79 लाख करोड़ रुपये पर पहुंच गया है। 2020-21 में यह केवल 64,080 करोड़ रुपये था। 2021-22 में 1.6 लाख करोड़ रुपये पर रहा। वित्त वर्ष 2022-23 में डिबेंचर्स और शेयरों में निवेश दोगुना होकर 2.06 लाख करोड़ रुपये पर पहुंच गया है। 2020-21 में यह 1.07 लाख करोड़ रुपये रहा था। 2021-22 में 2.14 लाख करोड़ रुपये के स्तर पर था।

वित्तीय देनदारी पिछले वित्त वर्ष में 73 फीसदी बढ़ गई है। 2022-23 में देनदारी 15.6 लाख करोड़ रही। 2021-22 में 9 लाख करोड़ रही थी। बचत केवल 14 फीसदी बढ़ी है जो 26.1 लाख करोड़ से बढ़कर 29.7 लाख करोड़ हो गई है। वित्तीय संस्थानों और गैर बैंकिंग वित्तीय संस्थाओं की ओर से दिए गए कर्ज में चार गुना की तेजी आई है। 2022-23 में यह 3.33 लाख करोड़ रुपये पर पहुंच गया। 2020-21 में 93,723 करोड़ रुपये था। 2021-22 में यह 1.92 लाख करोड़ रुपये था।

जीडीपी की तुलना में घरेलू बचत वित्त वर्ष 2022-23 में पांच दशक के निचले स्तर 5.3 फीसदी पर पहुंच गई है। कोरोना अवधि को छोड़कर 2012 से 2022 के बीच यह 7 से 8 फीसदी थी। विश्लेषकों का मानना है कि चूंकि बहुत अधिक खपत/खर्च का लाभ उठाया जाता है, इससे कुछ वर्गों में मांग में वृद्धि हुई है। उदाहरण के तौर पर जीडीपी अनुपात में हाउसिंग कर्ज 7.1 फीसदी था, जो एक साल पहले की तुलना में थोड़ा अधिक है।

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