एमआरएफ शेयर पर मिलेगा 194 रुपये का डिविडेंड, 5,000 रुपये सस्ता हुआ

मुंबई- देश के सबसे महंगे शेयर एमआरएफ (MRF) को पिछले दो बार से सोशल मीडिया पर मीम्स का सामना करना पड़ रहा था। इसकी वजह यह थी कि कंपनी ने प्रति शेयर तीन रुपये डिविडेंड की घोषणा की थी। लेकिन इस बार कंपनी ने इस परिपाटी को बदल दिया।

एमआरएफ ने फाइनेंशियल ईयर 2024 के लिए प्रति शेयर 194 रुपये का फाइनल डिविडेंड देने की घोषणा की है। इस तरह कंपनी इस फाइनेंशियल ईयर में प्रति शेयर कुल 200 रुपये का डिविडेंड देने जा रही है। कंपनी ने दो बार तीन-तीन रुपये का अंतरिम डिविडेंड दिया था। एमआरएफ देश में टायर बनाने वाली सबसे बड़ी कंपनी है और दुनिया की टॉप 20 टायर कंपनियों में शामिल है। यह दोपहिया वाहनों से लेकर फाइटर विमानों के लिए टायर बनाती है।

मार्च तिमाही में कंपनी का कंसोलिडेटेड नेट प्रॉफिट 16 फीसदी तेजी के साथ 396 करोड़ रुपये रहा जो पिछले साल समान तिमाही में 341 करोड़ रुपये था। हालांकि तिमाही आधार पर इसमें 22 फीसदी की गिरावट आई है। अक्टूबर-दिसंबर तिमाही में कंपनी का नेट प्रॉफिट 510 करोड़ रुपये रहा था।

इस दौरान कंपनी का रेवेन्यू नौ फीसदी बढ़कर 6,349 करोड़ रुपये रहा जो पिछले साल समान तिमाही में 5,842 करोड़ रुपये रहा था। बीएसई पर शेयर का शेयर 2.45 बजे (-4.13% की गिरावट के साथ 128400.50 रुपये पर ट्रेड कर रहा था। इसका 52 हफ्ते का उच्चतम स्तर 151,283.40 रुपये है। 23 फरवरी को कंपनी का शेयर इस मुकाम पर पहुंचा था।

आज एमआरएफ ही इसकी पहचान आज टायर बनाने वाली कंपनी के तौर पर है लेकिन कभी यह बच्चों के लिए गुब्बारे बनाया करती थी। इसका पूरा नाम मद्रास रबर फैक्ट्री है। केरल के एक ईसाई परिवार में जन्मे के. एम मैमन मापिल्लई (K. M. Mammen Mappillai) ने देश की आजादी से एक साल पहले यानी 1946 में चेन्नई में गुब्बारे बनाने की एक छोटी यूनिट लगाई। बाद में उन्होंने अमेरिका की मैन्सफील्ड टायर एंड रबर कंपनी से तकनीकी सहयोग लिया और टायर मैन्यूफैक्चरिंग यूनिट स्थापित कर दी।

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