अब छोटे शहरों तक पहुंची पार्सल धोखाधड़ी, ठगों के जाल में फंस रहे हैं लोग

मुंबई- पार्सल फ्रॉड पिछले कुछ समय से स्मार्ट सिटी और बड़े शहरों में प्रचलित था, मगर अब इन ठगों के निशाने पर छोटे और मझोले शहर भी आ गए है। टियर-II और टियर-III शहरों में रहने वाले लोगों के बीच पार्सल फ्रॉड से संबंधित जागरूकता कम है। इसलिए इन ठगों के जाल में यहां रहने वाले लोगों के फंसने की आशंका ज्यादा रहती है।

हाल ही में ऐसा ही एक कॉल मुंबई में एक विज्ञापन एजेंसी में काम करने वाली 32 वर्षीय युवती के पास आया। कॉल करने वाले ने दावा किया कि कनाडा से उसका एक पार्सल कस्टम विभाग में फंस गया था और इसे रिलीज करने के लिए कुछ हजार रुपये के भुगतान की आवश्यकता थी।

युवती का कनाडा में कोई रिश्तेदार नहीं है और उन्होंने किसी विदेशी ई-कॉमर्स साइट से कुछ भी ऑर्डर नहीं किया था। धोखाधड़ी का अंदेशा होने पर उन्होंने फोन काट दिया। विशेषज्ञों के मुताबिक, पार्सल फ्रॉड, जो कुछ समय से प्रचलित है, अब टियर- II और टियर-III शहरों में फैल गया है।

इस तरह की धोखाधड़ी में आम तौर पर टारगेट (किसी व्यक्ति) के पास एक कॉल आती है। सामने से फोन कॉल पर बात करने वाला ठग स्वयं की पहचान किसी कूरियर कंपनी के कर्मचारी के रूप में कराता है। इसके बाद ठग दावा करता है कि टारगेट के पार्सल में प्रतिबंधित पदार्थ रखे गए हैं।

अपनी बात पर विश्वास दिलाने के लिए ठग विस्तृत जानकारी प्रदान करता है और पीड़ित को तुरंत पुलिस या कस्टम विभाग के अधिकारियों को रिपोर्ट करने का निर्देश देता है। इसके तुरंत बाद, पीड़ित के पास पुलिस या कस्टम विभाग के अधिकारी बनकर ठग की तरफ से कॉल आने लगती हैं। कभी-कभी, ये कॉल करने वाले किसी पुलिस स्टेशन जैसी बैकग्राउंड में पुलिस अधिकारी बनकर वीडियो कॉल करते हैं।

इन फोन कॉल का उद्देश्य पीड़ित को यह विश्वास दिलाना है कि पुलिस इस मामले में शामिल है और उन्हें स्थिति को सुलझाने के लिए धनराशि का भुगतान करने की आवश्यकता है। इसके बाद, शुरू होता है डराने-धमकाने का सिलसिला। करंजावाला एंड कंपनी की पार्टनर मेघना मिश्रा कहती हैं, पीड़ित को गिरफ्तारी समेत सभी संभावित परिणाम भुगतने की धमकी दी जाती है और पैसे ट्रांसफर करने के लिए मजबूर किया जाता है।

इस घोटाले में कुछ विविधताएं हैं। कभी-कभी, ठग एक लिंक शेयर करते हैं और पीड़ित से पार्सल जारी करने के लिए एक छोटा सा पेमेंट करने के लिए कहते हैं। जब पीड़ित लिंक पर क्लिक करता है, तो बैकग्राउंड में एक स्क्रीन मिररिंग ऐप डाउनलोड हो जाता है। जैसे ही पीड़ित पेमेंट करता है, अपराधी उसके बैंक अकाउंट या वॉलेट की डिटेल्स चुरा लेते हैं और बाद में बड़ी रकम ट्रांसफर कर लेते हैं।

कभी-कभी, अपराधी Google पर नकली लिंक पब्लिश करते हैं। किसी प्रमुख लॉजिस्टिक्स कंपनी से पार्सल की उम्मीद करने वाले व्यक्ति कभी-कभी कंपनी की वेबसाइट सर्च कर सकते हैं और इन नकली लिंक से उनका सामना हो सकता हैं। सर्च इंजन ऑप्टिमाइजेशन (SEO) के माध्यम से, इन धोखाधड़ी वाले लिंक को पहले प्रदर्शित किया जाता है, जिससे बिना सोचे-समझे यूजर्स को नकली लैंडिंग पेज पर ले जाया जाता है। फिर पीड़ित को सीमा शुल्क या किसी अन्य कथित कारण से पेमेंट करने के लिए कहा जाता है, इस वादे के साथ कि पेमेंट के बाद पार्सल जारी कर दिया जाएगा। अपराधी पैसे ले लेते हैं और पार्सल कभी डिलीवर नहीं किया जाता।”

विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह की धोखाधड़ी इसलिए होती है क्योंकि विदेश से पार्सल कौन ले रहा है, इसका डेटा ई-कॉमर्स कंपनी या उसके वेयरहाउसिंग या लॉजिस्टिक्स पार्टनर से चोरी हो जाता है। पार्सल फ्रॉड से बचने का सबसे बेहतर उपाय जागरूकता है। ताकि आप ऐसी घटनाओं के पैटर्न को पहचान सकें। आपको धोखाधड़ी का संदेह है, तो कॉल कट कर दें। एक पल रुकें और विचार करें कि क्या उनके अनुरोध सामान्य है। किसी भी वित्तीय लेनदेन में जल्दबाजी करने या व्यक्तिगत जानकारी का खुलासा करने से बचें।”

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