सेबी ने बीएसई से मांगे 159 करोड़ रुपये, शेयर में 19 पर्सेंट की तेज गिरावट

मुंबई- बाजार नियामक सेबी ने बीएसई को प्रीमियम मूल्य के बजाय उसके विकल्प अनुबंधों के ‘कुल मूल्य’ के आधार पर शुल्क का भुगतान करने का निर्देश दिया है। इसके बाद शेयर बाजार को अब ज्‍यादा रेगुलेटर फीस चुकानी पड़ सकती है। एक्‍सपर्ट्स का मानना है कि अनुबंध के कुल मूल्य (नोशनल वैल्यू) और प्रीमियम मूल्यों के बीच बड़े अंतर के कारण सेबी को बीएसई के नियामक शुल्क भुगतान में बढ़ोतरी होगी।

एक्सचेंज को पिछले वर्षों के अंतर भुगतान को ब्याज सहित चुकाने को कहा गया है। बीएसई के शुरुआती आंकड़ों से पता चलता है कि एक्सचेंज को 165 करोड़ रुपये के साथ जीएसटी का भुगतान करना पड़ सकता है। सेबी के इस कदम के बाद बीएसई का शेयर सोमवार को एनएसई में 13.31 फीसदी लुढ़क गया। यह 2,783 रुपये पर बंद हुआ। कारोबार के दौरान एक समय यह शेयर करीब 19 फीसदी तक भरभरा गया था।

बीएसई ने शुक्रवार को नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) को दी सूचना में कहा, ‘बीएसई को विकल्प अनुबंध के मामले में कुल मूल्य पर विचार करते हुए सेबी को वार्षिक कारोबार के आधार पर नियामक शुल्क का भुगतान करने की सलाह दी गई है।’ सूचना में कहा गया, साथ ही बीएसई को बची हुई बिना भुगतान वाली राशि पर 15 फीसदी प्रति वर्ष ब्याज के साथ पिछली अवधि के लिए नियामक शुल्क का भुगतान करने को कहा गया है। पत्र प्राप्त होने के एक महीने के भीतर राशि का भुगतान करने का निर्देश दिया गया है।

सेबी के पत्र में उल्लेख किया गया कि डेरिवेटिव कॉन्‍ट्रैक्‍ट की शुरुआत के बाद से बीएसई कुल मूल्य के बजाय विकल्प अनुबंधों के लिए प्रीमियम मूल्य पर विचार करते हुए नियामक को वार्षिक कारोबार पर नियामक शुल्क का भुगतान कर रहा है। बीएसई ने रविवार को कहा कि वह वर्तमान में सेबी के पत्र में किए गए दावे की वैधता का मूल्यांकन कर रहा है।

विकल्प कारोबार में ‘नोशनल’ यानी कुल कारोबार, किए गए सभी अनुबंधों के कुल खरीद/बिक्री मूल्य का प्रतिनिधित्व करता है। जबकि ‘प्रीमियम टर्नओवर’ कारोबार, किए गए सभी अनुबंधों पर भुगतान किए गए ‘प्रीमियम’ का जोड़ है। चूंकि कुल मूल्य ‘प्रीमियम’ कारोबार से अधिक है, ऐसे में कुल कारोबार का चयन करने पर ऊंचे शुल्क का भुगतान करना होगा। बीएसई ने कहा कि अगर यह राशि देनी पड़ती है तो वित्त वर्ष 2006-07 से वित्त वर्ष 2022-23 तक के लिए कुल अतिरिक्त सेबी विनियामक शुल्क 68.64 करोड़ रुपये के अलावा जीएसटी होगा। इसमें 30.34 करोड़ रुपये का ब्याज शामिल है।

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