सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड पर देना पड़ सकता है 30 फीसदी तक टैक्स, यह है नियम

मुंबई- सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड यानी एसजीबी में अगर आप निवेश करते हैं तो यह ध्यान रखिए कि जिस टैक्स दायरे में आप आते हैं, उसी अनुसार आपको टैक्स देना होगा। यह टैक्स अधिकतम 30 फीसदी तक भी हो सकता है।

सोने की बढ़ती कीमतों ने एक बार फिर से लोगों को सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड यानी एसजीबी में निवेश के लिए आकर्षित किया है। 14 अप्रैल को सोने की कीमतें 72,500 रुपये प्रति 10 ग्राम को छूने के बाद से अगस्त और सितंबर 2024 श्रृंखला के एसजीबी बेचने के लिए बोलियां बढ़ रही हैं। एसजीबी आपको भौतिक सोने से जुड़े भंडारण और शुद्धता की चिंता के बिना डीमैट रूप में सोने में निवेश करने की अनुमति देता है। एक बार खरीदा गया बॉन्ड आठ साल बाद ही परिपक्व होता है। हालांकि, आप इसके जारी होने के पांचवें वर्ष के बाद भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के जरिये भी बेच सकते हैं। आप एसजीबी को पांचवें वर्ष से पहले भी शेयर बाजार में बेच सकते हैं।

यदि आप अपनी एसजीबी इकाइयों को एक्सचेंजों पर बेचने की योजना बना रहे हैं या आपने 2016 में इसमें निवेश किया है तो यह अब परिपक्व हो गई है और आप पैसा ले सकते हैं। लेकिन इसे भुनाने से पहले आपको इस पर लगने वाले टैक्स को भी जानना जरूरी है। ऐसा इसलिए है, क्योंकि आरबीआई किसी पैसे के भुगतान से पहले कर नहीं लगाता है। हालाँकि, आपको अपना रिटर्न दाखिल करते समय करों का भुगतान करना होगा।

इस ब्याज को आपको कर रिटर्न में अन्य आय के कॉलम में दिखाना होगा। मान लीजिए कि आपने 2016 वाले बॉन्ड में 2.92 लाख का निवेश किया था। अब आप इसे भुनाना चाहते हैं को आपको 7.24 लाख रुपये मिलेगा। इसमें सोने के मूल्य के 6.6 लाख रुपये के अलावा 64,152 रुपये का ब्याज शामिल है।

एसजीबी निवेश अगर आप परिपक्वता तक रखते हैं तो इस पर कैपिटल गेन पर छूट मिलती है। चूंकि आपने बॉन्ड को परिपक्व होने तक अपने पास रखा था, इसलिए आपको सोने की कीमतों में बढ़ोतरी के रूप में प्राप्त 6.6 लाख रुपये पर कोई कर नहीं देना होगा। साल में दो बार मिलने वाला ब्याज आपकी आय में जोड़ा जाता है और टैक्स स्लैब के अनुसार टैक्स लगाया जाता है। इसलिए यदि आप 30 फीसदी के टैक्स दायरे में हैं, तो आपको एसजीबी ब्याज पर भी 30 फीसदी की दर से टैक्स देना होगा।

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