युवाओं में सर्वाधिक बेरोजगारी, यह अस्थाई, सीखने में लगाते हैं ज्यादा टाइम

मुंबई- आरबीआई की मौद्रिक नीति समिति यानी एमपीसी सदस्य आशिमा गोयल ने कहा कि देश के युवा वर्ग में बेरोजगारी सबसे ज्यादा है। हालांकि, यह अस्थाई है। ऐसा इसलिए है, क्योंकि युवा कौशल हासिल करने व उद्यम शुरू करने में ज्यादा समय लगाते हैं। मजबूत वृद्धि के साथ रोजगार सृजन में लगातार सुधार भी हो रहा है।

गोयल ने कहा, अधिक योग्य लोगों में युवा बेरोजगारी ज्यादा हैं, लेकिन वे ज्यादा वेतन भी कमाते हैं। इंतजार के दौरान वे अनौपचारिक काम करते हैं या उद्यमिता में जोखिम उठाते हैं, जहां बहुत अच्छा काम करते हैं। अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन (आईएलओ) की रिपोर्ट के मुताबिक, 2022 में भारत की बेरोजगार आबादी में बेरोजगार युवाओं की हिस्सेदारी 83 फीसदी थी।

गोयल ने कहा, बेहतर स्वास्थ्य, बुनियादी ढांचे, बीमा, शिक्षा और कौशल प्रशिक्षण सुविधाओं के माध्यम से युवाओं के लिए अवसरों को बढ़ाया जा सकता है, न कि स्थाई सरकारी नौकरियां देकर, जो सुरक्षा प्रदान करती हैं और साथ ही ठहराव भी। आईएलओ रिपोर्ट के अनुसार, हाल में बेरोजगारी घटी भी है। 2019 में यह 17.5 फीसदी और 2023 में 10 फीसदी थी। 2022 में बेरोजगारी 20-24 आयु वर्ग के लिए सबसे अधिक 16.9 फीसदी थी, लेकिन 30-34 आयु वर्ग के लिए औसत थी।

देश में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश घटने पर गोयल ने कहा, ऐसा इसलिए क्योंकि विकसित देशों में फिर से निवेश के प्रयास हो रहे हैं। वे आर्थिक सुरक्षा बढ़ाने के लिए निवेश को वापस आने के लिए प्रेरित कर रहे हैं। चुनाव से नीतिगत अनिश्चितता भी है। भारत उन निवेश संधियों को सही कर रहा है जो विदेशी पूंजी की पक्षपाती थीं। इसके साथ ही भारतीय अदालतों में होने वाली देरी को कम करने की जरूरत है, जिससे हमारी कानूनी प्रणाली में विदेशी पूंजी का विश्वास बेहतर हो सके।

गोयल ने कहा, जहां एफडीआई के कई फायदे हैं, वहीं इसकी लागत भी है। इसलिए यह बेहतर है कि घरेलू फर्मों को बढ़ावा देने के लिए करदाता संसाधनों का अधिक उपयोग किया जाए। ऐसे में भारत में उत्पादन करने वाली सभी प्रकार की कंपनियों के लिए और अधिक आकर्षक बनाने पर काम करना बेहतर है। भारत में एफडीआई कभी भी जीडीपी के 2 फीसदी से अधिक नहीं हुआ है। जबकि घरेलू निवेश 30 फीसदी से अधिक है।

चीन-प्लस वन रणनीति का लाभ उठाने में भारत के सक्षम होने पर गोयल ने कहा, भारत के लिए अमेरिकी ट्रेजरी या अन्य उच्च प्रति व्यक्ति आय वाले देशों की सरकारों के साथ प्रतिस्पर्धा करना मुश्किल है। क्योंकि वे अलग तरीके से प्रोत्साहन देते हैं। हालांकि, हम वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं में घरेलू कंपनियों की भागीदारी बढ़ाने के लिए सहयोग का उपयोग कर सकते हैं।

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