नेस्ले के बच्चों के दूध और सेरेलैक हैं स्वास्थ्य के लिए खतरनाक, ये है कारण

मुंबई- भारत में बेचे जाने वाले बेबी फूड में चीनी मिलाने को लेकर नेस्ले (Nestle) अब जांच के घेरे में आ गई है। हाल ही में एक रिपोर्ट आई थी जिसमें नेस्ले पर बच्चों के दूध और सेरेलक (Cerelac) में चीनी मिलाने की बात सामने आई थी। इन रिपोर्टों पर स्वत: संज्ञान लेते हुए भारत सरकार ने इसकी जांच की बात कही है।

रिपोर्ट के मुताबिक, एशिया, लैटिन अमेरिका और अफ्रीका में बिकने वाले छह महीने तक के बच्चों के लिए गेहूं से बने लगभग सभी बेबी फूड्स में प्रति कटोरी (1 सर्विंग) में एवरेज 4 ग्राम शुगर की मात्रा पाई गई। पब्लिक आई ने इन देशों में कंपनी के 150 प्रोडक्ट्स की जांच बेल्जियम स्थित लैब में की।

पब्लिक आई का यह दावा अगर सही पाया जाता है, तो यह वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन (WHO) के निर्देशों का उल्लंघन है। WHO के गाइडलाइन के मुताबिक 3 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए भोजन में कोई शुगर या मीठे पदार्थ का उपयोग नहीं किया जाना चाहिए।

इसमें सबसे ज्यादा फिलीपींस में 1 सर्विंग में 7.3 ग्राम शुगर मिली। वहीं, नाइजीरिया में 6.8 ग्राम और सेनेगल में 5.9 ग्राम शुगर बेबी फूड्स में देखने को मिला। इसके अलावा, 15 में से सात देशों ने प्रोडक्ट के लेवल पर शुगर होने की जानकारी ही नहीं दी।

रिपोर्ट के मुताबिक, नेस्ले भारत में करीब सभी बेबी सेरेलेक प्रोडेक्ट्स के हर एक सर्विंग में औसतन करीब 3 ग्राम शक्कर मिलाती है। वहीं, 6 महीने से 24 महीने तक के बच्चे के लिए बिकने वाले 100 ग्राम सेरेलेक में टोटल 24 ग्राम शुगर की मात्रा होती है।

रिपोर्ट में नेस्ले पर यह आरोप लगाया गया है कि नेस्ले अपने प्रोडेक्ट्स में मौजूद विटामिन, खनिज और अन्य पोषक तत्वों को प्रमुखता से उजागर करती है, लेकिन शुगर मिक्स के मामले में कंपनी पारदर्शी नहीं है।

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