कमाई से ज्यादा जरूरी है खर्च का हिसाब-किताब, बचत करने में मिलेगी मदद

आजकल के युवा अक्सर सोचते हैं कि हम जितना घर ले जाते हैं,उससे कहीं अधिक कमाते हैं। हकीकत में यह ठीक उल्टा है। आप जितना कमाते हैं, उससे कम घर ले आते हैं। यह आपको तब पता चलेगा, जब आप अपने बैंक खाते, खर्च और अन्य का हिसाब-किताब करेंगे।

वेतन से कमाने वाले अक्सर यही सोचते हैं कि वे बताई गई आय के जितना ही कमाते हैं। यह सच नहीं है, क्योंकि अगर कॉस्ट-टू-कंपनी (सीटीसी। 12 लाख रुपये सालाना तो आपको पीएफ या एनपीएस और ऐसे किसी अन्य लाभ पाने के लिए कटौती या थोड़ा बहुत बचत शुरू करने की जरूरत है। आपके खाते में पैसा जमा होने से पहले कंपनी भी टैक्स काटती है। अक्सर कंपनियां फूड कूपन और अन्य लाभ भी देते हैं जो नकदी के बराबर होते हैं। पर इन्हें नकदी में नहीं दिया जाता है। इसका मतलब है कि प्रति माह एक लाख रुपये की कमाई वास्तव में 70,000 और 80,000 रुपये के बीच होती है।

अगर हम वेतन की गणना करें तो आपके अनुमानित वेतन का कुल ढाई से 3 महीने का वेतन आपके पास नहीं आता है। यदि आपने विशेषज्ञ अश्नीर ग्रोवर का वीडियो देखा है तो इससे पता चलता है कि सैलरी पाने वाले लोग अमूमन अपनी सालाना सैलरी का 3 महीने की सैलरी टैक्स और दूसरे योगदान में देते हैं। इसके विपरीत, एक बिजनेसमैन खर्चों के बाद अपनी कुल आय पर टैक्स चुकाता है, जबकि एक सैलरी पाने वाले को पहले टैक्स काट कर पैसा मिलता है। फिर वे उपभोग की जाने वाली लगभग हर चीज पर जीएसटी का भी भुगतान करते हैं।

एक समय था जब लोग मासिक खर्चों और वित्तीय प्रतिबद्धताओं का प्रबंधन करने के लिए बजट बनाते थे। अब यह अवधारणा खत्म हो रही है। ईंधन की कीमतें कुछ हफ्तों में बदल रही हैं। घर पर बिजली की खपत इस बात पर निर्भर कर रही है कि आपने कितने दिन घर पर बिताए या काम पर गए। अब बजट बनाकर वित्तीय जीवन जीना कठिन है। फिर भी बचत और खर्चों की जांच जरूरी है। यदि कोई मासिक सैलरी पाने वाला अपने माता-पिता के साथ रहता है तो उसे कुल आय का 25-35 फीसदी निवेश के लिए बचाना चाहिए।

यदि वे अकेले रह रहे हैं तो लगभग 15-25% बचाएं। जीवन में महत्वपूर्ण और जरूरी चीजें जैसे भोजन, किराया, किराने का सामान और ऐसी ही अन्य चीजें आपकी आय के 45-50 फीसदी से अधिक नहीं होनी चाहिए। 20-25% की बचत करनी चाहहे। 35-40 फीसदी हिस्सा टैक्स और गैजेट जैसी वस्तुओं पर खर्च कर सकते हैं।

ऐसे लोगों को इस राशि को हर महीने बचत और निवेश में अलग रखना होगा जो ऑटोमैटिक हैं ताकि वे बिना सोचे-समझे खर्च करने के लिए लालच में न पड़ें। आपने एक सीजन में दो आईपीएल मैच देखा तो कम से कम 15,000 रुपये चला गया। यह आप जो सैलरी मान रहे हैं उसका 15 फीसदी है, लेकिन वास्तव में यह लगभग 20-25 फीसदी है। एक सैलरी पाने वाले व्यक्ति के रूप में यह महत्वपूर्ण है कि आप जानें कि आप क्या कमाते हैं, फिर एक निश्चित राशि बचाएं जिसे निवेश में लगाया जाए और फिर जो बचे उसे खर्च करें।

करियर के कुछ शुरुआती साल वित्तीय स्वतंत्रता का अनुभव करने के लिए अच्छे हैं, लेकिन ये ऐसे वर्ष भी हैं जो आपको बचत और निवेश की नींव बनाने में मदद करेंगे। जितनी जल्दी बचत और निवेश करना शुरू करेंगे, उतनी ही अच्छी संभावना है कि जब आप शादी करेंगे और जीवन में अन्य वित्तीय जिम्मेदारियों का सामना करेंगे तब तक आपके पास अच्छी खासी रकम होगी।

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