सीमेंट की कीमतें बढ़ने से सस्ते मकानों पर हो सकता है असर, बढ़ेंगी कीमतें

मुंबई- देश भर में सीमेंट की कीमतें बढ़ने से सस्ते मकानों के निर्माण में बाधा आ सकती है। साथ ही, ग्राहकों को घर खरीदने के लिए ज्यादा दाम देना पड़ सकता है। रियल एस्टेट से जुड़े अधिकारियों का कहना है कि आने वाले समय में उद्योग पर इसका असर दिखेगा।

बिल्डरों के मुताबिक, सस्ते घरों के निर्माण में पहले से ही धीमापन है। अब सीमेंट के दाम बढ़ने से खुदरा ग्राहक, बड़े पैमाने पर कंस्ट्रक्शन प्रोजेक्ट और इन्फ्रा प्रोजेक्ट प्रभावित हो सकते हैं। पिछले हफ्ते उत्तरी भारत में 10-15 रुपये, मध्य भारत में 30-40 रुपये और पश्चिमी भारत में 20 रुपये प्रति बोरी सीमेंट की कीमतें बढ़ी हैं।

उद्योग के मुताबिक, कमजोर मांग के कारण पिछले पांच महीने में सीमेंट की कीमतें घटीं थीं। बिल्डरों का कहना है कि अब कीमतें बढ़ने से सस्ते घरों की मांग धीमी हो सकती है। नेशनल रियल एस्टेट डेवलपमेंट काउंसिल यानी नरेडको के चेयरमैन निरंजन हीरानंदानी ने कहा, सस्ते घरों की मांग पहले से ही कमजोर है। सीमेंट के दाम बढ़ने से यह लोगों की पहुंच से बाहर हो जाएगा। साथ ही अन्य सभी की लागत बढ़ जाएगी।

बिल्डरों का कहना है कि सीमेंट के ऊंचे दाम से ग्राहकों का सेंटिमेंट प्रभावित होगा। इन्फ्रा प्रोजेक्ट भी प्रभावित होंगे। कंस्ट्रक्शन की लागत में योगदान देने वाले कारकों में कच्चे माल, बिजली, परिवहन और सीमेंट के दाम शामिल हैं।

सीमेंट की कीमतें बढ़ने से बिल्डरों को अपने बजट का पुनर्मूल्यांकन करने की जरूरत हो सकती है क्योंकि सीमेंट के दाम बढ़ने से निर्माण लागत पर 4 से 5 रुपये का असर पड़ता है। ऐसे में वे अपने प्रोजेक्ट की संभावित कीमत में इसे जोड़ सकते हैं।

भारत दुनिया में सीमेंट का दूसरा सबसे बड़ा उत्पादक है। वैश्विक स्थापित क्षमता में इसकी हिस्सेदारी 8 प्रतिशत से अधिक है। क्रिसिल रेटिंग के मुताबिक, मकानों और इन्फ्रा गतिविधियों पर खर्च से भारतीय सीमेंट उद्योग ने वित्त वर्ष 2024 में 8 करोड़ टन सीमेंट की क्षमता जोड़ी है। यह पिछले दस वर्षों में सबसे अधिक है। वित्त वर्ष 2027 तक सीमेंट की खपत 45 करोड़ टन तक पहुंचने की उम्मीद है। सीमेंट की मूल्य वृद्धि का प्रभाव पूरे निर्माण क्षेत्र में दिखेगा। इसका असर खुदरा ग्राहकों, बड़े पैमाने पर निर्माण परियोजनाओं और बुनियादी ढांचे की पहल पर समान रूप से पड़ेगा।

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