सितंबर तक 100 डॉलर पहुंच सकता है कच्चा तेल, देशों के बीच तनाव का असर

मुंबई- कच्चे तेल के और महंगे होने की आशंका है। जेपी मॉर्गन एंड चेज का अनुमान है कि अगस्त या सितंबर तक यह 100 डॉलर के पार हो सकता है। कई देशों के बीच नए सिरे से तनाव और आपूर्ति घटने से तेल की कीमतें आने वाले समय में तेजी से बढ़ेंगी। हाल में यह छह महीने के शीर्ष पर 90 डॉलर को पार कर गई थीं।

जानकारी के मुताबिक, इस समय इस्रायल और ईरान के बीच तनाव का माहौल है। कभी भी दोनों देशों में युद्ध की स्थिति बन सकती है। साथ ही कमोडिटी संचालित महंगाई फिर से वापस दिखने लगी है। इससे कच्चे तेल की कीमतें बढ़ने की प्रबल आशंका है। मेक्सिको द्वारा कच्चे तेल के निर्यात को कम करने का हालिया कदम वैश्विक दबाव को बढ़ा रहा है। इससे दुनिया के सबसे बड़े तेल उत्पादक अमेरिका में स्थानीय स्तर पर तेल की ज्यादा खपत बढ़ गई है।

अमेरिकी प्रतिबंधों ने रूसी माल को समुद्र में फँसा दिया है। अगला लक्ष्य वेनेजुएला की आपूर्ति को बाधित करना है। लाल सागर में टैंकरों पर हूती विद्रोहियों के हमलों के कारण कच्चे तेल के शिपमेंट में देरी हुई है। इतने उथल-पुथल के बावजूद भी ओपेक और उसके सहयोगी अपने उत्पादन में कटौती पर अड़े हुए हैं। इन संकट के कारण वैश्विक बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड के लगभग दो वर्षों में पहली बार 100 डॉलर तक पहुंचने का खतरा पैदा हो गया है।

विश्लेषकों के मुताबिक, तेल की कीमतों से महंगाई की चिंता भी बढ़ रही है। इससे केंद्रीय बैंकों की दर कटौती की योजनाओं पर असर पड़ सकता है। तेल के लिए अभी सबसे बड़ा चालक आपूर्ति पक्ष है। वैश्विक आधार पर मांग ठीक है, लेकिन आपूर्ति कम है। मेक्सिको से तेल शिपमेंट पिछले महीने 35% गिरकर 2019 के बाद से सबसे निचले स्तर पर आ गया, क्योंकि राष्ट्रपति एंड्रेस मैनुअल लोपेज ओब्रेडोर देश को महंगे ईंधन आयात से छुटकारा दिलाने के वादे को पूरा करने की कोशिश कर रहे हैं। मार्च में मेक्सिको, अमेरिका, कतर और इराक ने अपने संयुक्त तेल प्रवाह में प्रतिदिन 10 लाख बैरल से अधिक की कटौती की।

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