महिलाओं के लाली लिपिस्टिक पर लगता है टैक्स, कंपनियां लेती हैं पिंक टैक्स

मुंबई- महिलाओं को बेची जाने वाली कुछ खास चीजों पर पिंक टैक्स लगाया जाता है। पर्सनल केयर प्रॉडक्ट्स, खिलौनों और यहां तक कि कुछ खास तरह की सर्विसेज पर भी पिंक टैक्स लगता है। हाल में बायोकॉन की चीफ किरण मजूमदार-शॉ ने इस बारे में एक वीडियो पोस्ट किया था जिसमें महिलाओं को इस तरह के प्रॉडक्ट्स का बहिष्कार करने का आह्वान किया गया था।

हालांकि यह केवल भारत की ही समस्या नहीं है बल्कि पूरी दुनिया में ऐसा होता है। साल 2015 में न्यूयॉर्क सिटी डिपार्टमेंट ऑफ कंज्यूमर अफेयर्स की एक स्टडी में पाया गया कि एक ही तरह का काम करने वाली कमोडिटी के लिए महिलाओं से औसतन करीब सात फीसदी ज्यादा रकम वसूली जाती है। पर्सनल केयर प्रॉडक्ट्स के मामले में तो पुरुषों की तुलना में महिलाओं से ज्यादा पैसे वसूले जाते हैं।

दुनियाभर में महिलाओं और पुरुषों के वेतन में काफी अंतर है जिसने प्रॉडक्ट्स की कीमत में इस असमानता को और बढ़ा दिया है। यानी महिलाओं को पुरुषों की तुलना में कम वेतन मिल रहा है लेकिन उनके लिए बने प्रॉडक्ट्स की कीमत ज्यादा है। औसतन महिलाओं की कमाई पुरुषों की तुलना में औसतन 16 फीसदी कम है। यानी पुरुष जहां एक डॉलर कमाता है वहीं महिलाओं को 84 सेंट ही मिलते हैं। लेकिन महिलाओं के हाइजीन प्रॉडक्ट्स पर टैक्स से उन्हें ज्यादा खर्च करना पड़ता है।

सवाल पैदा होता है कि पिंक टैक्स की क्या वजह है। इसके पीछे यह तर्क भी दिया जाता है कि अगर महिलाएं समान प्रॉडक्ट्स के लिए ज्यादा पैसे देने के लिए तैयार हैं तो फिर बाजार को इसका फायदा क्यों नहीं उठाना चाहिए। कुछ लोगों का यह भी तर्क होता है कि पुरुषों और महिलाओं के लिए बनाए जाने वाले प्रॉडक्ट्स एक तरह के नहीं होते हैं। साल 2015 की स्टडी में बच्चों के स्कूटर का हवाला दिया गया। लड़कियों के लिए बनाए गए पिंक स्कूटर की कीमत लड़कों के लिए बनाए गए रेड स्कूटर की तुलना में दोगुनी थी। इसके पीछे यह तर्क दिया जाता है कि कंपनी ज्यादा रेड स्कूटर बनाती है और उन्हें बनाना सस्ता पड़ता है।

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