बच्चों के साथ भी करें वित्तीय प्रबंधन की बातचीत, बेहतर होगा उनका भविष्य

मुंबई- जब आप अपने बच्चों को साल दर साल बढ़ते हुए देखते हैं तो आपको एहसास होता है कि स्कूल में या कॉलेज में आपको कभी भी व्यक्तिगत रूप से पैसों के प्रबंधन की शिक्षा नहीं दी गई। अक्सर लोग इस बात पर पछताते हैं कि उनके पास स्कूल में कोई ऐसा पाठ्यक्रम नहीं था जो उन्हें अपने पैसों को संभालना सिखाता हो।

आर्थिक प्रबंधन की सीख लेकर जब आप बड़े होते हैं तो यह आपके लिए लंबे समय में फायदेमंद साबित होता है और जीवन में समझदारी भरे वित्तीय निर्णय लेने में मदद करता है। मूल रूप से, अधिकांश लोग जब बड़े होते हैं तो अपने पर्सनल फाइनेंस को संभालने के बारे में गलती करके सीखते हैं। अगर उन्हें बचपन से ही पैसों के प्रबंधन के बारे में नहीं बताया गया है तो इसकी संभावना और भी बढ़ जाती है।

प्राइमरी और मिडल स्कूल के गणित में बच्चों को लाभ और हानि, साधारण और चक्रवृद्धि ब्याज के बारे में तो पढ़ाया जाता है, लेकिन उन्हें अपने पैसों के साथ कैसे उपयोग करना चाहिए, इसके बारे में कहीं कोई चर्चा नहीं है। कई शहरी परिवारों ने स्कूल जाने वाले बच्चों के लिए पॉकेट मनी की अवधारणा को अपनाया है। यह एक अच्छी शुरुआत है, लेकिन इसमें शायद ही कभी स्पष्टता से बताए जाते हैं कि क्या करना है और क्या नहीं।

बच्चों को पैसे की खर्च करने की क्षमता से परिचित कराना बुरा नहीं है। लेकिन, बच्चों को यह समझाने की ज़रूरत है कि वे किस पर खर्च कर रहे हैं और क्या वे वास्तव में साथियों के दबाव के कारण खर्च कर रहे हैं या सिर्फ इसलिए कि उनके पास पैसे हैं। एक स्मार्ट तरीका यह होगा कि उनसे किसी ऐसी चीज के बारे में बात करें जो वे वास्तव में चाहते हैं लेकिन उनकी जेब खर्च से वह नहीं मिल सकती। उन्हें अपना सबसे अच्छा बचत विकल्प तय करने में मदद करें। फिर उन्हें प्रेरित रखने के लिए प्रोग्रेस चार्ट बनाएं। जब वे अपने लक्ष्य तक पहुंचें तो उनकी तारीफ करना न भूलें।

समय-समय पर थोड़े से अलाउन्स देकर उन्हें पैसे की कीमत का परिचय कराएं। यह उन्हें कक्षा में अच्छे अंक प्राप्त करने के लिए प्रोत्साहित करने या किसी प्रतियोगिता में भाग लेने और मौद्रिक पुरस्कार प्राप्त करने के तरीके से हो सकता है। अलाउन्स पाने से बच्चों को पैसे की कीमत और खुद के लिए विकल्प चुनने का परिचय मिलता है। बच्चे जब पैसे कमाते हैं तो अलग-अलग तरीके से खर्च करते हैं। जब उन्हें पैसे दिए जाते हैं तो अलग-अलग तरीके से खर्च करते हैं।

बचत पर जोर दें क्योंकि यह पैसा सिर्फ खर्च करने के बारे में नहीं है। उन्हें उन चीजों के लिए बचत करने के लिए प्रोत्साहित करें जो वे चाहते हैं लेकिन उनके पास जो भत्ता है उससे वे नहीं खरीद सकते। देर से मिलने वाली संतुष्टि और कुछ पाने के बदले कुछ खोने का कांसेप्ट जब जीवन में कम उम्र में ही सिखाया जाता है तो उनमें से कई लोग जीवन में बेहतर वित्तीय फैसला लेते हैं। एक छोटा सा हिस्सा अलग रखने की आदत डालें। उनकी जेब खर्च का 10% या उन्हें गिफ्ट में मिलने वाले पैसे को बचत के लिए उपयोग किया जा सकता है।

एक बार जब बच्चे कुछ पैसे बचा लेते हैं, तो आप उनसे निवेश के बारे में बात करने व इसे चक्रवृद्धि ब्याज जैसे लाभ और हानि के सबक से जोड़ सकते हैं। इस तरह, पैसे पर ओनरशिप की भावना जागृत होने के साथ-साथ, आपका बच्चा अपनी बचत पर शोध करने और उसे प्रबंधित करने का महत्व सीख सकता है।

गर्मियों में नौकरी या अपनी दुकान या कार्यालय में काम करने के लिए बच्चों को प्रोत्साहित करें। आप उन्हें घर पर भी काम दे सकते हैं, जिसमें सफाई करना या उन चीजों को व्यवस्थित करना शामिल हो सकता है जिन्हें आप टालते आ रहे हैं। सुनिश्चित करें कि आपका बच्चा अपनी कमाई का कुछ हिस्सा बचा रहा है और उन्हें यह समझने के लिए प्रोत्साहित करें कि पैसा कमाया जाता और कैसे कमाया जाता है। वे दोस्तों के साथ मूवी देखने या बाहर घूमने जा सकते हैं और अपनी कमाई से खर्च कर सकते हैं।

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