प्रवासी भारतीयों ने तीसरी तिमाही में भारत में भेजे रिकॉर्ड 29 अरब डॉलर राशि

मुंबई- प्रवासी भारतीयों ने दिसंबर तिमाही में भारत में रिकॉर्ड 29 अरब डॉलर की रकम भेजे हैं। इसका कारण यह है कि विदेशी मुद्रा – गैर निवासी यानी एफसीएनआर से मिल रहे रिटर्न में लगातार तेजी आ रही है। इस वजह से पश्चिमी देशों के बैंकों के जमा की तुलना में यहां पर ज्यादा ब्याज मिल रहा है। 2023 में कुल 100 अरब डॉलर की रकम मिलने का अनुमान जताया गया है।

आरबीआई के आंकड़ों के मुताबिक, 1991 में उदारीकरण के बाद से अब तक का यह रिकॉर्ड है। कोविड के बाद के सर्वेक्षण से पता चला है कि सबसे ज्यादा रकम 23 फीसदी अमेरिका से भारत भेजी जा रही है। खाड़ी देशों से आने वाली रकम में गिरावट आ रही है। विश्लेषकों के मुताबिक, पिछला वित्त वर्ष वैश्विक स्तर पर एक अच्छा वर्ष रहा है। विशेष रूप से अमेरिका के लिए। साथ ही, विदेशी कंपनियां अधिकांश बोनस का भुगतान दिसंबर में करती हैं।

आरबीआई के सर्वेक्षण के मुताबिक, भारत में आई रकम का बड़ा हिस्सा पारिवारिक जरूरतों के लिए जा रहा है। एक हिस्सा जमा जैसे अन्य साधनों में निवेश किया जाता है। सेवाओं के निर्यात में वृद्धि के अलावा भारत में आने वाली रकम से दिसंबर तिमाही में चालू खाता घाटा को सकल घरेलू उत्पाद यानी जीडीपी की तुलना में 1.2% पर नियंत्रित करने में मदद मिली है। 2022 की दिसंबर तिमाही में यह घाटा दो फीसदी था।

विश्लेषकों के मुताबिक, इस रिकॉर्ड रकम के आने के कई कारण हो सकते हैं। एक तो त्योहारी सीजन में परिवारों की जरूरतों के लिए पैसा भेजना। दूसरा डॉलर की तुलना में रुपये में गिरावट और तीसरा बैंकों की ओर से एफसीएनआर में ज्यादा ब्याज। अप्रैल-जनवरी 2023-24 के दौरान एफसीएनआर जमा में कुल 4.15 अरब डॉलर की रकम आई है। यह उसके पहले के साल की तुलना में तीन गुना अधिक है।

भारत जी20 समूह में मैक्सिको के बाद दूसरा सबसे सस्ता प्रेषण प्राप्त करने वाला बाजार है। हालांकि, कुछ अन्य मामलों में इसकी लागत दूसरे देशों की तुलना में ज्यादा है। इसलिए एक नीतिगत उपाय की जरूरत है ताकि मनी ट्रांसफर सेवा योजना का विस्तार किया जा सके।

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