आईपीओ से अगले वित्त वर्ष में कंपनियां जुटा सकती हैं 70,000 करोड़ रुपये

मुंबई- चालू वित्त वर्ष में बाजार से 62,000 करोड़ रुपये जुटाने के बाद कंपनियां अगले वित्त वर्ष यानी 2024-25 में 70,000 करोड़ रुपये आईपीओ के जरिये जुटा सकती हैं। शेयर बाजार की तेजी अगले वित्त वर्ष में भी जारी रहने की उम्मीद है। इसलिए इसका फायदा इश्यू लाने वाली कंपनियां उठा सकती हैं। साथ ही विदेशी निवेशक भी बाजार में अच्छी खासी रकम का निवेश कर सकते हैं।

आंकड़ों के अनुसार, करीब 19 कंपनियां मिलकर 25,000 करोड़ रुपये जुटा सकती हैं। इन सबको पूंजी बाजार नियामक सेबी की मंजूरी मिल चुकी है। 37 कंपनियां 45,000 करोड़ रुपये जुटाने की योजना बना रही हैं। इन्होने सेबी के पास मसौदा जमा कराया है। सभी कंपनियां मंजूरी का इंतजार कर रही हैं।

कुल 56 कंपनियों में से 9 कंपनियां नए जमाने की टेक सेक्टर की हैं। ये करीब 21,000 करोड़ रुपये आईपीओ के जरिये जुटा सकती हैं। अगले वित्तीय वर्ष में आईपीओ की रफ्तार तेज रहने की उम्मीद है। बड़ी कंपनियां भी बाजार में उतरने वाली हैं। इसमें टाटा कैपिटल से लेकर बिग बॉस्केट तक शामिल हैं।

आईपीओ यानी प्राथमिक बाजार को जिस वजह से तेजी मिलेगी, उनमें घरेलू पूंजी में वृद्धि, बेहतर गवर्नेंस, एफडीआई समर्थन के साथ अनुकूल सरकारी नीतियां और संस्थागत निवेशक शामिल हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि आम चुनावों के बावजूद अप्रैल और मई में कुछ आईपीओ लॉन्च होते दिखेंगे, हालांकि रफ्तार धीमी रहेगी। सबसे पहले आईपीओ तीन अप्रैल को भारती हेक्साकॉम का आएगा। यह भारती एयरटेल की कंपनी है।

टाटा समूह अपनी इलेक्ट्रिक कंंपनी को बाजार में लिस्ट कराने की योजना बना रहा है। हालांकि, अभी तक इसकी रकम का खुलासा नहीं हुआ है। साथ ही कंपनी अगले वित्त वर्ष में या फिर 2025-26 में बाजार में उतर सकती है। फूड डिलीवरी एप स्विगी भी बाजार में उतरने वाला है। अभी तक इसकी भी रकम और तारीख का खुलासा नहीं हुआ है। दोनों कंपनियां सेबी के पास मसौदा जमा करने की तैयारी में हैं। इनके अलावा मोबिक्विक, पेयू, गरुड़ा एरोस्पेस, एनटीपीसी ग्रीन और अन्य कंपनियां भी अगले वित्त वर्ष में आईपीओ ला सकती हैं।

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