चालू वित्त वर्ष में बाजार पूंजी 125 लाख करोड़ बढ़ी, निफ्टी में 27 फीसदी रिटर्न

मुंबई- भारतीय शेयर बाजार ने चालू वित्त वर्ष में निवेशकों को मालामाल कर दिया है। कुल पूंजीकरण 125 लाख करोड़ रुपये बढ़ी है। जबकि इस दौरान एनएसई के निफ्टी ने 27 फीसदी का जबरदस्त रिटर्न निवेशकों को दिया है। आंकड़े बताते हैं कि चालू वित्त वर्ष में सेंसेक्स, निफ्टी, सभी मिडकैप और स्मॉलकैप इंडेक्स के साथ कई सेक्टर ने सार्वकालिक स्तर छुआ है। हालांकि, सेबी की चिंता जताने के बाद मार्च में इन शेयरों में अच्छी खासी गिरावट आ गई।

इस दौरान सेंसेक्स 14,660 अंक या 25 पर्सेंट जबकि एनएसई निफ्टी 4,967 अंक या 28 पर्सेंट बढ़कर बंद हुआ है। चालू वित्त वर्ष में स्मॉलकैप सबसे पसंदीदा रहे हैं। बीएसई स्मॉलकैप के 1,000 शेयरों की कुल पूंजी 26 लाख करोड़ रुपये बढ़कर 66 लाख करोड़ रुपये रही है। है। इसमें से हर चौथे शेयर ने कई गुना का रिटर्न दिया है। हालांकि, 124 शेयरों ने घाटा भी दिया है। इसका सबसे ज्यादा फायदा खुदरा निवेशकों को हुआ है। उन्होंने अच्छा खासा निवेश किया है।

प्रमुख स्मॉलकैप में जय बालाजी ने 1,878 फीसदी का रिटर्न दिया है। वारी रिन्यूएबल ने 810 फीसदी, फोर्स मोटर ने 522 फीसदी, आइनॉक्स विंड ने 441 फीसदी, सुजलॉन एनर्जी ने 369 और कल्याण ज्वेलर्स ने 281 फीसदी का रिटर्न दिया है। इनके अलावा इरकॉन, जुपिटर वैगन, आरवीएनएल, कोचिन शिपयार्ड, पीटीसी और मझगांव डाक ने भी कई गुना का फायदा दिया है।

2018 से बात करें तो मिड और स्मॉलकैप ने सालाना 30 फीसदी और 37 फीसदी की चक्रवृद्धि दर से रिटर्न दिया है। इसी दौरान लार्जकैप ने केवल 16 फीसदी की दर से फायदा दिया है।

निफ्टी 50 शेयरों में कोल इंडिया, अदाणी पोर्ट्स, टाटा मोटर्स और बजाज ऑटो निवेशकों के पसंदीदा स्टॉक रहे हैं। इन्होंने 101-136 फीसदी तक रिटर्न दिया। बेंचमार्क इंडेक्स के करीब 41 शेयरों ने 95 फीसदी तक रिटर्न दिया। रिलायंस इंडस्ट्रीज ने 28 फीसदी और टीसीएस ने 20 फीसदी का फायदा दिया।

सेंसेक्स में मजबूत वजन रखने वाले एचडीएफसी बैंक ने निराश किया है। इसने 10 फीसदी का घाटा दिया है। एचयूएल ने इसी दौरान 13 फीसदी का घाटा दिया है। जिन सेक्टरों ने मुनाफा दिया है उसमें ऑटोमोबाइल, कैपिटल गुड्स, कंज्यूमर ड्यूरेबल, रक्षा, औद्योगिक सेक्टर में सर्वाधिक तेजी रही। सरकार ने इन क्षेत्रों में स्थानीय विनिर्माण के लिए काफी प्रयास किए हैं।

चालू वित्त वर्ष में विदेशी संस्थागत निवेशकों यानी एफआईआई ने 2.04 लाख करोड़ रुपये का शेयर खरीदा है। यह वित्त वर्ष 2021 में 2.74 लाख करोड़ निवेश के बाद दूसरा रिकॉर्ड है। वित्तीय सेवा, ऑटो, कैपिटल गुड्स और दूरसंचार में सर्वाधिक खरीदी की। इस भारी निवेश का कारण अगले वित्त वर्ष में दरों में कटौती और वर्तमान सरकार के तीसरी बार सत्ता में आने का है। इन्होंने तीन महीने शेयर बेचे और 9 महीने खरीदारी की।

एफआईआई ने इक्विटी के अलावा डेट में भी 1.19 लाख करोड़ का निवेश किया। वित्त वर्ष 2018 के बाद यह सर्वाधिक निवेश है। पिछले वित्त वर्ष में इन्होंने 8,937 करोड़ रुपये के शेयर बेचे थे। इस तरह से इक्विटी और बॉन्ड में कुल निवेश 3.33 लाख करोड़ रहा है जो सार्वकालिक उच्च स्तर है।

चालू वित्त वर्ष में कुल 75 कंपनियों ने आईपीओ लाया। यह पिछले दो वर्षों में सबसे अधिक है। इन कंपनियों ने 61,915 करोड़ रुपये बाजार से जुटाए। 2022-23 में 37 कंपनियों ने 52,116 करोड़ जुटाए थे। 75 में से 50 आईपीओ मूल्य से ऊपर कारोबार कर रहे हैं। इनका औसत रिटर्न 65 फीसदी है। 5 ने 150 फीसदी से ज्यादा रिटर्न दिया।

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