84 फीसदी दिहाड़ी कामगार काम से संतुष्ट, पर सामाजिक सुरक्षा बड़ी चुनौती

मुंबई- देश के 84 फीसदी दिहाड़ी कामगार अपने काम से संतुष्ट हैं। 29 फीसदी मानते हैं कि यहां कमाई की ज्यादा क्षमता है। 24 फीसदी कहते हैं कि स्वतंत्रता ज्यादा है। इस वजह से वे इस क्षेत्र में काम करने के लिए उत्साहित रहते हैं। इप्सोस रिसर्च ने अक्तूबर और नवंबर में यह सर्वे किया है। इसमें दिल्ली, मुंबई, चेन्नई, बंगलूरू, कोलकाता और हैदराबाद शामिल हैं।

स्विगी, जोमेटो, ऊबर, ओला, रैपिडो, अमेजन, फ्लिपकार्ट, जेप्टो, बिग बास्केट जैसे प्लेटफॉर्म पर काम करने वाले 3,668 कामगारों के साथ यह सर्वे किया गया है। 65 फीसदी गिग कामगार तीन साल से अधिक समय से काम कर रहे हैं। 88 फीसदी गिग कामगारों के लिए दिहाड़ी रोजगार ही उनकी आय का प्राथमिक स्रोत है।

दो तिहाई मानते हैं कि यह प्लेटफॉर्म उनकी आजीविका चलाने के लिए पर्याप्त मासिक आय देता है। एक तिहाई ने माना कि उन्हें अपने मूल शहर से बड़े शहर में जाने का अवसर मिला है। 29 फीसदी का कहना है कि सामाजिक सुरक्षा का लाभ न मिलना सबसे बड़ी चुनौती है।

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