दुनिया के कई देश मंदी की चपेट में, कनाडा की 800 कंपनियां हुईं दिवालिया

मुंबई- ब्रिटेन समेत दुनिया के कई देश इस समय मंदी की चपेट में हैं। जापान बाल-बाल इससे बचा है लेकिन अब कनाडा के मंदी में फंसने का खतरा पैदा हो गया है। देश में दिवालिया के लिए अप्लाई करने वाली कंपनियों की संख्या तेजी से बढ़ी है। केवल जनवरी में ही 800 से अधिक कंपनियों ने बैंकरप्सी के लिए आवेदन किया। इससे पहले 2023 में देश में दिवालिया फाइलिंग में करीब 40 फीसदी की तेजी देखने को मिली।

अभी जितनी कंपनियां बैंकरप्सी के लिए आवेदन कर रही हैं, वह संख्या 13 साल में सबसे ज्यादा है। कोरोना काल के दौरान कंपनियों को 45,000 डॉलर का ब्याज मुक्त लोन दिया गया था जिसे चुकाने की डेडलाइन जनवरी में खत्म हुई थी। कनाडा की जीडीपी में छोटी कंपनियों की करीब 33 फीसदी हिस्सेदारी है। सवाल उठ रहा है कि क्या कनाडा मंदी की तरफ बढ़ रहा है?

कनाडा के सरकारी आंकड़ों की मानें तो देश की इकॉनमी मजबूत बनी हुई है। लेकिन छोटी कंपनियों और कई कंज्यूमर्स को संघर्ष करना पड़ रहा है। दिसंबर में कनाडा की इकॉनमी के 0.3 फीसदी बढ़ने की संभावना है। इस तरह चौथी तिमाही में इसमें 1.2 फीसदी की तेजी की संभावना है। तीसरी तिमाही में देश की जीडीपी में 1.1 फीसदी गिरावट रही थी। लगातार दो तिमाहियों में गिरावट को मंदी कहा जाता है।

जनवरी में जिस तरह से एक के बाद एक 800 कंपनियों ने बैंकरप्सी के लिए आवेदन किया, उससे एक बार फिर मंदी की आशंका सिर उठाने लगी है। कनाडा के राष्ट्रपति जस्टिन ट्रूडो ने पिछले साल भारत से पंगा लिया था। ट्रूडो ने खालिस्तानी आतंकी हरदीप सिंह निज्जर की हत्या में भारत का हाथ बताया था। इसके बाद से दोनों देशों के बीच तनाव काफी बढ़ गया था। दोनों देशों ने ही एक-दूसरे के टॉप डिप्लोमेट्स को निष्कासित किया था।

इस समय ब्रिटेन समेत दुनिया के आठ देश मंदी में फंसे हैं। इनमें ब्रिटेन के अलावा डेनमार्क, एस्तोनिया, फिनलैंड, लक्जमबर्ग, मोल्दोवा, पेरू और आयरलैंड शामिल हैं। दिलचस्प बात है कि इनमें से छह देश यूरोप के हैं। इस लिस्ट में अफ्रीका और नॉर्थ अमेरिका का कोई देश नहीं है। जापान मंदी से बाल-बाल बचा है। कई और देशों पर भी मंदी का खतरा मंडरा रहा है। इनमें जर्मनी भी शामिल है। यूरोप की यह सबसे बड़ी इकॉनमी कई मोर्चों पर संघर्ष कर रही है। चीन में हालात भी लगातार खराब होते जा रहे हैं। अमेरिका पर भी कर्ज लगातार बढ़ रहा है और यह जीडीपी का 125 परसेंट से अधिक पहुंच चुका है।

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