मिड और स्मॉल कैप में अभी एकमुश्त निवेश से बचें, एसआईपी बेहतर तरीका

मुंबई- मिड और स्मॉल कैप शेयरों में इस समय भारी बिकवाली है। निवेशकों के करीब छह लाख करोड़ रुपये डूब चुके हैं। फिर भी विश्लेषक मानते हैं कि अगर इन दोनों सेगमेंट में निवेश करना है तो एसआईपी ही बेहतर तरीका है।

विश्लेषकों का कहना है कि मिड और स्मॉल कैप शेयरों का मूल्यांकन अभी बहुत ज्यादा है। पिछले कुछ वर्षों में इन दोनों में जमकर निवेश आया है। हालांकि, इन्होंने रिटर्न भी बहुत ज्यादा दिया है। ऐसे में पिछले रिटर्न को देखकर अगर कोई निवेश करता है तो यह जोखिम हो सकता है। निवेशकों को जोखिम से बचाने के लिए ही सेबी ने हाल में फैसला लिया है। जानकारों का कहना है कि अगर मिड और स्मॉल कैप में निवेश करना है तो आप एकमुश्त निवेश बिलकुल मत करिये। लंबे समय के लिए आप एसआईपी कर सकते हैं। इस समय चूंकि मूल्यांकन गिरा है, ऐसे में सस्ते भाव में आपको म्यूचुअल फंड यूनिट मिल जाएंगे। ध्यान रखें, निवेश कम से कम पांच साल के लिए हो।

सेबी दरअसल निवेशकों की सुरक्षा करना चाहता है। इसलिए उसने 27 फरवरी को फंड हाउसों को पत्र लिखा। इसमें मिड कैप और स्मॉल कैप पर चिंता जताया। इसने कहा, निवेशकों के हितों की सुरक्षा के लिए फंड हाउस नीति तैयार करें। फंड हाउसों को भी यह बात पता थी कि मूल्यांकन ज्यादा है। सेबी ने स्ट्रेस टेस्ट का परिणाम 15 मार्च तक वेबसाइट पर डालने को कहा। हालांकि, पहले भी फंड हाउस अपने स्तर पर यह काम करते थे, पर यह कभी सार्वजनिक नहीं हुआ। इस बार फंड हाउसों को जब इसे सार्वजनिक करना पड़ा तो बाजार में हाहाकार मच गया।

स्ट्रेस टेस्ट का मतलब यह है कि अगर कभी अचानक मिड और स्मॉल कैप में भारी निकासी आ जाए तो उससे कैसे निपटा जा सकता है। ज्यादा निकासी पर कितने दिन में इसे पूरा किया जा सकता है। स्टॉक में तरलता कितने दिनों की है। दरअसल, जो भारी निवेश इन दोनों सेगमेंट में आया है और रिटर्न चौंकाने वाला है, उसे देखकर नए निवेशक आ रहे हैं। जबकि इन दोनों सेगमेंट में बहुत ज्यादा तरलता नहीं होती है। ऐसे में फंड हाउस निवेशकों की ओर से आ रहे पैसों को कहां लगाएंगे, यह भी सुनिश्चित करना होगा।

ज्यादातर फंड हाउसों ने फरवरी में स्मॉल कैप शेयरों को बेचा है। कुछ ने मिडकैप में खरीदी की है। फंड हाउसों ने हाल के समय में ज्यादातर निवेश इन्हीं दोनों सेगमेंट में किया है। ज्यादा खरीदारी से इन शेयरों ने 70-80 फीसदी तक का रिटर्न दिया है। इसी रिटर्न को देखकर खुदरा निवेशक लगातार पैसे लगा रहे थे। ऐसे में इन शेयरों में कभी भी भारी निकासी होने की आशंका थी, जिससे इसमें बने रहने वाले निवेशकों को घाटा हो सकता था।

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