सोने के एवज में दिए गए कर्ज की समीक्षा करें बैंक, सरकार को मिलीं गड़बड़ी

मुंबई-वित्त मंत्रालय ने सभी सरकारी बैंकों से सोने के गहनों के एवज में दिए गए कर्ज की स्थिति की समीक्षा करने को कहा है। कई मामलों में नियमों का अनुपालन नहीं होने का मामला सामने आने के बाद यह कदम उठाया गया है। वित्तीय सेवा विभाग यानी डीएफएस ने सरकारी बैंकों को लिखे पत्र में कहा, कर्ज से संबंधित प्रणाली और प्रक्रियाओं पर ध्यान देने की जरूरत है।

डीएफएस सचिव विवेक जोशी ने कहा, हमने बैंकों से सोने के एवज में दिए गए लोन की व्यापक समीक्षा करने को कहा है। गारंटी के बिना सोने के एवज में कर्ज का वितरण, शुल्क संग्रह और नकद में भुगतान को लेकर गड़बड़ियां पाई गई हैं। इन्हें दुरुस्त करना जरूरी है। डीएफएस ने बैंकों से एक जनवरी, 2022 से 31 जनवरी, 2024 तक की अवधि के लोन की गहन समीक्षा करने को कहा है।

समीक्षा का मकसद यह सुनिश्चित करना है कि गोल्ड लोन बैंकों की नियामकीय और आंतरिक नीतियों के अनुरूप दिए गए हैं। एक महीने में 10 ग्राम सोने की कीमत 63,365 रुपये से बढ़कर रिकॉर्ड 67,605 रुपये पर पहुंच गई है। विभाग के समक्ष ऐसे कर्ज के संबंध में नियमों का अनुपालन नहीं होने के मामले सामने आए हैं। देश के सबसे बड़े बैंक एसबीआई ने दिसंबर, 2023 तक 30,881 करोड़ रुपये का गोल्ड लोन दे रखा है। तीसरी तिमाही के अंत में पंजाब नेशनल बैंक का लोन 5,315 करोड़ रुपये था। बैंक ऑफ बड़ौदा का गोल्ड कर्ज 3,682 करोड़ था।

सरकार ने आरबीआई को शुल्क का भुगतान किए बिना सोना आयात की मंजूरी दी है। सरकार का लक्ष्य केंद्रीय बैंक के लिए सोने के आयात की लागत को कम करना है। इसका असर घरेलू सोना बाजार पर भी पड़ेगा। इससे आपूर्ति में बढ़ोतरी हो सकती है जिससे कीमतों में कमी आ सकती है। सरकार ने एक अधिसूचना में कहा, आरबीआई को सोना आयात करने में रियायत दी गई है। इस फैसले का असर देश के चालू खाते के घाटे और समग्र आर्थिक स्थिरता पर भी पड़ेगा।

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